Skip to content

Yog Darshan

Yog Sutra 2 - 53

अध्याय 2: साधनपाद

मूल सूत्र · 2.53

धारणासु च योग्यता मनस: ।। 53 ।।

शब्दार्थ

च ( और ) मनस: ( मन को ) धारणासु ( कहीं भी एकाग्र करने की ) योग्यता ( काबलियत या सामर्थ्य बढ़ जाता है । )

सूत्रार्थ

और ( प्राणायाम के करने से ) मन को कहीं पर भी एकाग्र करने या लगाने की काबलियत या सामर्थ्य बढ़ जाता है ।

व्याख्या

इस सूत्र में प्राणायाम के अन्य लाभ को बताया गया है ।

प्राणायाम करने से पूर्व हमारे प्राण की गति अनियंत्रित व असहज होती है । प्राण के अनियंत्रित व असहज होने से हमारे मन की गति भी अनियंत्रित व असहज हो जाती है । लेकिन जैसे ही हम प्राणायाम का अभ्यास करना शुरू करते हैं वैसे ही हमारे प्राण की गति नियंत्रित व सहज होने लगती है । जिससे हमारे मन की गति भी नियंत्रित व सहज हो जाती है ।

एक सामान्य व्यक्ति एक मिनट में पन्द्रह (15) से अठारह (18) श्वसन पूरे करता है । और यदि किसी प्रकार की कोई व्याधि या बीमारी की अवस्था है तो यह संख्या और भी बढ़ जाती है । लेकिन प्राणायाम के करने से प्रति मिनट श्वसन की संख्या घटती रहती है । क्योंकि प्राणायाम करने से हमारा प्राण सूक्ष्म हो जाता है ।

प्राण के सूक्ष्म होने से उसकी गति पर पूरी तरह से हमारा नियंत्रण हो जाता है । और श्वास व प्रश्वास का अनियंत्रित क्रम रुक जाता है । जिससे मन की चंचलता भी रुक जाती है । क्योंकि प्राण का मन पे पूरी तरह से प्रभाव पड़ता है । प्राण के अनियंत्रित होने से हमारा मन अनियंत्रित हो जाता है । और प्राण के नियंत्रित होते ही मन भी नियंत्रण में आ जाता है ।

प्राण व मन के इसी सम्बन्ध के विषय में हठप्रदीपिका में स्वामी स्वात्माराम कहते हैं कि जैसे ही वात अर्थात प्राण चलता है वैसे ही मन भी उसके साथ- साथ चलता है । और जैसे ही वात अर्थात प्राण की गति रुकती है वैसे ही मन की गति भी उसके साथ ही रुक जाती है* ।

इस प्रकार मन पर पूरा नियंत्रण आने पर साधक में अपने मन को कहीं पर भी एकाग्र या स्थिर करने की योग्यता आ जाती है । इससे योगी साधक जहाँ चाहे वहीं पर अपने मन को धारण कर सकता है बिना किसी बाधा के ।

अतः प्राणायाम करने से साधक में  अपने मन को कहीं पर भी धारण अर्थात एकाग्र करने की काबलियत आ जाती है । यह प्राणायाम का दूसरा लाभ है ।

*  चले वाते चलं चित्तं निश्चले निश्चलं भवेत् ।  ( ह०प्र० 2/2 )

Reader discussion

Comments (8)

These comments have been preserved from the original Dr. Somveer Yoga website.

  1. Nisha

    Thanku sir??

  2. Anshu

    ?Prnam Aacharya ji! Thank you so much for explaining a sharp concentration through Pranayama …. Dhanyavad Aacharya ji ??

  3. Yogacharya Tarun

    ओउम जी प्रणाम

  4. आलोक कुमार पटवा

    ॐ गुरुदेव*

    आपका बहुत बहुत आभार ।

  5. Anju siwach

    Thank you sir

  6. Priyanka Atreya

    Pranaam Sir! ??your examples are really helpful in making the Sutra easy.

  7. aashish malhan

    Parnayam main benefit nicely explain guru ji.

  8. Yashawant Shahu Wadgave

    Nice explaination Sir ????