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Yog Darshan

Yog Sutra 2 - 47

अध्याय 2: साधनपाद

मूल सूत्र · 2.47

प्रयत्नशैथिल्यानन्तसमापत्तिभ्याम् ।। 47 ।।

शब्दार्थ

प्रयत्न ( सभी शारीरिक गतिविधियों या सभी प्रकार की शारीरिक कोशिशों को ) शैथिल्य ( शिथिल कर देना या रोक देना ) अनन्त ( जिसका कभी अन्त नहीं होता अर्थात ईश्वर या परमात्मा में  ) समापत्तिभ्याम् ( पूरा ध्यान लगाने से आसन में सिद्धि मिलती है । )

सूत्रार्थ

सभी प्रकार के शारीरिक क्रियाकलापों को रोक देने से और उस अनन्त परमात्मा में ध्यान लगाने से साधक का आसन सिद्ध होता है । अर्थात उसे आसन में सफलता प्राप्त होती है ।

व्याख्या

इस सूत्र में आसन की सिद्धि के उपायों का वर्णन किया गया है ।

आसन में सिद्धि अर्थात सफलता प्राप्त करने के लिए साधक को आसन का अभ्यास करते हुए अपनी समस्त शारीरिक गतिविधियों को रोक देना चाहिए । शरीर को बिना हिलाएं- डुलाएं एक ही अवस्था में स्थिर कर देना चाहिए । साथ ही इस अवस्था में हमारा शरीर सुखपूर्वक होना चाहिए । किसी भी प्रकार का कोई तनाव, खिंचाव या कम्पन नहीं होना चाहिए । शरीर एकदम से स्थिर और सुखमय अवस्था में होना चाहिए । शरीर के स्थिर होने से मन भी स्थिर हो जाता है । जिससे एकाग्रता बढ़ती है ।

यह तो हुई शरीर की अवस्था । इसके बाद जब शरीर एकदम से स्थिर और सुखमय अवस्था में आ जाए, तब उस अनन्त व सर्वशक्तिमान परमात्मा में अपना ध्यान लगाना चाहिए ।

इस प्रकार से जब कोई साधक आसन के नियम को मानता है, तो उसे आसनों में सफलता अर्थात सिद्धि प्राप्त होती है ।

अतः आसन की सिद्धि के लिए पूरी तरह से स्थिरता व एकाग्रता की आवश्यकता होती है । तभी हमारा आसन सिद्ध होता है ।

अतः आसन की सिद्धि के लिए हमें अपने शरीर की सभी चेष्टाओं ( क्रियाकलापों ) को रोक देना चाहिए । जैसे ही हम शरीर की सभी चेष्टाओं को रोकते हैं वैसे ही हमारे शरीर की कम्पन खत्म हो जाती है । फिर अपने चित्त को उस अनन्त परमात्मा में लगाने से हमारा आसन सिद्ध हो जाता है ।

आसन में सिद्धि प्राप्त होने पर हमें क्या फल प्राप्त होता है । इसकी व्याख्या अगले सूत्र में की गई है ।

Reader discussion

Comments (5)

These comments have been preserved from the original Dr. Somveer Yoga website.

  1. Nisha

    Thanku so much sir??

  2. Anshu

    ?प्रणाम आचार्य जी! ओ3म् सुन्दर गुरु वचन!ओ3म् राम! धन्यवाद गुरु जी! ???

  3. आलोक कुमार पटवा

    ॐ गुरुदेव*

    अति सुंदर व्याख्या ।

    आपको हृदय से आभार।

  4. Priyanka Atreya

    Pranaam Sir! ??Aasan ki bahut sundar vyakhaya

  5. aashish malhan

    All condition will avoided and mind will be set only god (supreme power) asana,s siddi to get guru ji.