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Yog Darshan

Yog Sutra 2 - 51

अध्याय 2: साधनपाद

मूल सूत्र · 2.51

बाह्याभ्यन्तरविषयाक्षेपी चतुर्थ: ।। 51 ।।

शब्दार्थ

बाह्य ( श्वास को बाहर निकाल कर बाहर ही रोकना ) आभ्यन्तर ( श्वास को अन्दर लेकर अन्दर ही रोकना ) विषय ( कार्य या कर्म का ) आक्षेपी ( त्याग या विरोध करने वाला ) चतुर्थ: ( यह चौथा प्राणायाम है । )

सूत्रार्थ

श्वास को बाहर रोकने व अन्दर रोकने के विषय अर्थात कार्य का त्याग या विरोध करने वाला यह चौथा प्राणायाम है ।

व्याख्या

इस सूत्र में चौथे प्राणायाम की विधि का वर्णन किया गया है ।

चौथे प्राणायाम की विधि बिलकुल अलग प्रकार की है । इसकी विधि को बताते हुए कहा है कि पहले और दूसरे प्राणायाम की विधियों के विपरीत आचरण करना ही चौथे प्राणायाम की विधि है ।

इसके लिए एक बार फिर से पहले और दूसरे प्राणायाम की विधियों को समझ लेते हैं ।

पहला प्राणायाम बाह्यवृत्ति होता है । जिसमें श्वास को शरीर से बाहर निकाल कर अपने सामर्थ्य के अनुसार बाहर ही रोक दिया जाता है । इसे बाह्यवृत्ति प्राणायाम कहा है ।

दूसरा प्राणायाम आभ्यन्तर वृत्ति होता है । जिसमें श्वास को अन्दर लेकर अपनी सामर्थ्य के अनुसार अन्दर ही रोके रखते हैं । यह आभ्यन्तर वृत्ति प्राणायाम कहलाता है ।

अब यह जो चौथा प्राणायाम बताया गया है । इसमें मुख्य रूप से ऊपर वर्णित इन दोनों ही प्राणायामों की विधियों का विरोध इनसे विपरीत विधि का उपयोग किया जाता है । जिसका वर्णन इस प्रकार है -

पहले पूरे श्वास को बाहर निकाल कर बाहर ही रोक दें । अब जैसे ही प्राण को अन्दर लेने की इच्छा या मन हो तो वैसे ही उसे अन्दर लेने की बजाय अन्दर बचे हुए प्राण को ही बाहर निकाल दें । ऐसा तब तक करते रहें जब तक की पूरा प्राण बाहर न निकल जाए या प्राण को और बाहर न निकाला जा सके ।

इसी प्रकार पूरे प्राण को अन्दर लेकर उसे अन्दर ही रोक लें । अब जैसे ही प्राण बाहर निकलने की कोशिश करें वैसे ही बाहर बचे हुए प्राण को और अन्दर भर लें । इसे भी तब तक अन्दर भरते रहें जब तक कि श्वास को अन्दर लेने की सम्भावना समाप्त न हो जाए ।

इस प्रकार यह चौथा प्राणायाम ( बाह्याभ्यन्तरविषयाक्षेपी ) कहलाता है । इस चौथे प्राणायाम को आरम्भ में केवल तीन- तीन बार ही करें । कुछ समय के बाद गुरु के निर्देशन में इसके अभ्यास को बढ़ाया जा सकता है ।

विशेष

कोई भी आसन, प्राणायाम या अन्य यौगिक अभ्यासों को केवल पुस्तकों में ही पढ़कर इनका अभ्यास न करें । इनका अभ्यास हमेशा किसी अच्छे योग गुरु के निर्देशन ( देखरेख ) में ही करें । अन्यथा लाभ की जगह हानि भी हो सकती है ।

https://youtu.be/oSs6LSmHU_Q

Reader discussion

Comments (3)

These comments have been preserved from the original Dr. Somveer Yoga website.

  1. Nisha

    Thanku sir??

  2. Anshu

    ?प्रणाम आचार्य जी! इस बेहतरीन ढंग से सूत्र को प्रस्तुत करने के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद! ?

  3. aashish malhan

    Well defined about Fourth parnayam how different It from first and second parnayama guru ji.