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Yog Darshan

Yog Sutra 4 - 4

अध्याय 4: कैवल्यपाद

मूल सूत्र · 4.4

निर्माणचित्तान्यस्मितामात्रात् ।। 4 ।।

शब्दार्थ

चित्तानि ( चित्तों की )  निर्माण ( उत्पत्ति ) अस्मितामात्रात् ( अहंकार नामक तत्त्व से होती है )

सूत्रार्थ

चित्तों की उत्त्पत्ति का कारण अस्मिता अर्थात अहंकार नामक तत्त्व होता है ।

व्याख्या

इस सूत्र में चित्तों के उपादान अर्थात उत्पत्ति कारण को बताया गया है ।

यहाँ पर चित्त के अनेक रूपों को बनाने की बात कही गई है । जिस प्रकार प्रकृति के कुछ उपादान कारणों की वजह से हमारे शरीर का निर्माण या उत्पत्ति होती है । उसी प्रकार चित्त की उत्पत्ति का कारण अस्मिता अर्थात अहंकार नामक उपादान कारण होता है ।

प्रकृति के सत्त्व, रज व तम नामक तीन गुणों से महत्तत्व अर्थात बुद्धि का निर्माण होता है । महतत्त्व से अस्मिता अर्थात अहंकार का निर्माण होता है । फिर इस अहंकार नामक तत्त्व से चित्त का निर्माण होता है । सांख्य दर्शन में अहंकार से मन की उत्पत्ति मानी जाती है । लेकिन यहाँ पर उसे चित्त कहकर संबोधित किया गया है ।

यहाँ पर अनेक चित्तों के निर्माण की बात को हम दो अर्थों में देख सकते हैं । एक तो यह कि योगी एक से ज्यादा चित्तों का निर्माण कर ले । और दूसरा यह है कि योगी अपने चित्त को विभिन्न ( अलग- अलग ) स्तर का बना लेता है । इन दोनों में से पहले वाली बात कुछ न्याय संगत नहीं लगती कि योगी बहुत सारे चित्त बना सकता है । लेकिन दूसरी बात में प्रमाणिकता दिखती है । क्योंकि योगी अपने चित्त को योग साधना के बल से किसी भी स्तर या कई स्तरों का बना सकता है ।

जिसे हम कह सकते हैं कि योगी विभिन्न चित्तों वाला है । विभिन्न चित्त का सही व सार्थक अर्थ यही लगता है कि चित्त को कई स्तर का बनाया जा सकता है । न कि विभिन्न चित्तों का निर्माण किया जा सकता है ।

इस प्रकार योगी चित्त को अलग- अलग विषयों में प्रवृत्त करने में समर्थ हो जाता है । लेकिन उन सभी विषयों में प्रवृत्त होने वाला चित्त मुख्य रूप से एक ही होता है । विभिन्न प्रकार का नहीं । इस बात का प्रमाण अगले सूत्र में भी दिया गया है ।

Reader discussion

Comments (4)

These comments have been preserved from the original Dr. Somveer Yoga website.

  1. Lata sudhir baisane

    Dhanyawad.

  2. Anju siwach

    Thank you sir

  3. aashish malhan

    Nice explain guru ji how ego help to build chitta.

  4. Anshu

    ??प्रणाम आचार्य जी! सुन्दर सूत्र! उत्तम वण॔न! धन्यवाद! ओम ?