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Yog Darshan

Yog Sutra 4 - 20

अध्याय 4: कैवल्यपाद

मूल सूत्र · 4.20

एकसमये चोभयानवधारणम् ।। 20 ।।

शब्दार्थ

च ( और ) एकसमये ( एक ही काल अर्थात समय में ) उभय ( दोनों अर्थात चित्त और विषय के स्वरूप को ) अनवधारणम् ( धारण नहीं किया जा सकता या उनका ज्ञान नहीं हो सकता )

सूत्रार्थ

एक ही समय में एक साथ चित्त व विषय दोनों को ही एक साथ ग्रहण नहीं किया जा सकता । अर्थात एक ही समय में चित्त और विषय का ज्ञान एक साथ नहीं हो सकता ।

व्याख्या

इस सूत्र में चित्त को एक समय में एक ही विषय को ग्रहण करने योग्य बताया है ।

जैसे ही कोई वस्तु या पदार्थ चित्त के सम्पर्क में आती है । वैसे ही आत्मा ( पुरुष ) उसका साक्षात्कार कर लेता है । यह एक सर्वमान्य सिद्धान्त है । क्योंकि चित्त जड़ पदार्थ है और आत्मा चेतन है । चित्त देखने का मात्र माध्यम होता है । देखने वाला तो वह चेतन आत्मा ही है । जैसे ही किसी पदार्थ का प्रतिबिम्ब चित्त पर पड़ता है । वैसे ही वह आत्मा चित्त के माध्यम से उस पदार्थ का ज्ञान प्राप्त कर लेता है ।

अकेला चित्त इस कार्य को करने में सक्षम नहीं होता । क्योंकि वह स्वयं सत्त्व, रज व तम आदि गुणों से निर्मित जड़ पदार्थ है । जो निरन्तर परिवर्तनशील है । यदि यह कहा जाए कि चित्त एक ही समय में अपने व किसी अन्य पदार्थ का ज्ञान प्राप्त कर सकता है । तो यह बात सिद्धान्त के विरुद्ध होगी । क्योंकि जो स्वयं परिणामी अर्थात परिवर्तनशील हो । वह कैसे एक साथ दो विषयों के स्वरूप को जान सकता है ?

चित्त तो केवल अपने सम्पर्क में आने वाले पदार्थ को दृष्टा अर्थात आत्मा के सामने प्रस्तुत करने का कार्य करता है । उसका ज्ञान तो स्वयं आत्मा द्वारा ही किया जाता है । क्योंकि वह आत्मा ही अपरिणामी अर्थात अपरिवर्तनशील है । केवल वही ज्ञान प्राप्त करने की क्षमता रखता है अन्य कोई नहीं । किसी भी पदार्थ या वस्तु के ज्ञान का ग्रहण ( धारण ) वही कर सकता है जो अपरिवर्तनीय हो । परिवर्तनशील को एक समय में दो पदार्थों का ज्ञान नहीं हो सकता । यह उसके ( जड़ पदार्थ के ) विषय से बाहर की बात है ।

तभी पिछले सूत्र में भी चित्त को दृश्य ( देखने का माध्यम ) व आत्मा को दृष्टा ( देखने वाला ) बताया गया था ।

Reader discussion

Comments (5)

These comments have been preserved from the original Dr. Somveer Yoga website.

  1. Priyanka Atreya

    Pranaam Sir! The explanation of the Sutra are really very helpful in understanding it. Thank you for clear and easy meaning.

  2. Anju siwach

    Thank you sir

  3. Lata sudhir baisane

    Dhanyawad.

  4. Nisha bhardwaj

    Thanku sir??

  5. Aashish malhan

    Nice guru ji