Skip to content

Yog Darshan

Yog Sutra 4 - 13

अध्याय 4: कैवल्यपाद

मूल सूत्र · 4.13

ते व्यक्तसूक्ष्मा गुणात्मान: ।। 13 ।।

शब्दार्थ

ते ( वे अर्थात वह तीनों कालों में विद्यमान रहने वाले सभी पदार्थ ) व्यक्त ( प्रकट अर्थात प्रत्यक्ष ) सूक्ष्मा: ( छिपे हुए अर्थात अप्रत्यक्ष रूप में ) गुणात्मान: ( गुण रूप में मौजूद होते हैं )

सूत्रार्थ

तीनों कालों में विद्यमान रहने वाले सभी पदार्थ प्रकट अर्थात प्रत्यक्ष व अप्रकट अर्थात अप्रत्यक्ष रूप से गुणों के रूप में मौजूद रहते हैं ।

व्याख्या

इस सूत्र में गुणों के प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष स्वरूप को बताया गया है ।

यहाँ पर गुणों के स्वरूप की चर्चा की गई है । गुण तीन प्रकार के होते हैं । सत्त्वगुण, रजोगुण व तमोगुण । प्रकृति भी इन्हीं तीन गुणों से निर्मित है । इसीलिए प्रकृति को त्रिगुणात्मक कहा गया है । तीनों कालों ( भूतकाल, वर्तमान काल व भविष्य काल ) में जितने भी पदार्थ प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से विद्यमान होते हैं । वह सभी इन तीन गुणों से ही निर्मित होते हैं । इन तीन गुणों के अभाव में किसी भी पदार्थ का कोई अस्तित्व नहीं है ।

इनमें काल के अनुसार बदलाव होता रहता है । जैसे भूतकाल व भविष्य काल में यह गुण अव्यक्त अर्थात अप्रत्यक्ष रूप में होते हैं । और वर्तमान काल में यह गुण  व्यक्त अर्थात प्रत्यक्ष रूप में मौजूद होते हैं । प्रकृति से लेकर महतत्त्व, अहंकार, मन, दस इन्द्रियाँ, पाँच तन्मात्रा, पाँच महाभूत व मनुष्य की उत्पत्ति में भी इन तीनों गुणों का ही योगदान होता है । संसार के सभी पदार्थों की उत्पत्ति का आधार यही तीनों गुण होते हैं । इसीलिए इनको गुण स्वरूप कहकर सम्बोधित किया गया है । यह सब दृश्यमान संसार इन तीन गुणों की ही देन है ।

इन सभी गुणों का कोई स्थूल रूप अर्थात दिखाई देने वाला स्वरूप नहीं है । यह सूक्ष्म रूप में ही विद्यमान होते हैं । इनकी क्रिया- प्रतिक्रिया द्वारा ही इनका अनुभव किया जा सकता है । यही त्रिगुणात्मक प्रकृति की विशेषता होती है ।

इस प्रकार सभी धर्मों अर्थात पदार्थों का संचालन त्रिगुणों द्वारा ही सम्भव है । यही सभी पदार्थों का आधार हैं ।

Reader discussion

Comments (6)

These comments have been preserved from the original Dr. Somveer Yoga website.

  1. Anju siwach

    Thank you sir

  2. aashish malhan

    Nice guru ji.

  3. Yogi Narendra

    Very good explanation of prakriti and trigun. Thanks.

  4. आलोक कुमार पटवा

    ॐ गुरुदेव*

    गुणों के प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष स्वरूपों की अति सुन्दर व्याख्या प्रस्तुत की है आपने।इसके लिए आपको हृदय से आभार।

  5. Lata sudhir baisane

    Dhanyawad.

  6. Anshu

    ??प्रणाम आचार्य जी! धन्यवाद! ?