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Yog Darshan

Yog Sutra 4 - 2

अध्याय 4: कैवल्यपाद

मूल सूत्र · 4.2

जात्यन्तरपरिणाम: प्रकृत्यापूरात् ।। 2 ।।

शब्दार्थ

जाति ( शरीर व इन्द्रियों में ) अन्तर ( बदलाव  ) प्रकृति ( प्रकृति की ) आपूरात् ( पूर्णता के ) परिणाम ( परिणाम अथवा फल से होता है )

सूत्रार्थ

प्रकृति की पूर्णता से योगी के शरीर व उसकी इन्द्रियों में जो परिवर्तन होता है । वह जात्यन्तर परिणाम कहलाता है ।

व्याख्या

इस सूत्र में शरीर व इन्द्रियों में होने वाले विशेष परिवर्तन अर्थात जात्यन्तर परिणाम का वर्णन किया गया है ।

हमारे शरीर का निर्माण अनेक छोटी- छोटी कोशिकाओं से मिकलर हुआ है । प्रत्येक क्षण इन कोशिकाओं का विनाश व निर्माण होता रहता है । जैसे ही पुरानी कोशिकाएँ टूटती हैं । वैसे ही नई कोशिकाओं का निर्माण हो जाता है । इस प्रकार पुरानी कोशिकाओं के मरने व नई कोशिकाओं के बनने से कुछ समय के बाद हमारा शरीर बिलकुल नया बन जाता है ।

अच्छे योगाभ्यास, अनुकूल आहार, औषधियों अथवा रसायनों के उचित प्रयोग से हमारा शरीर पहले के मुकाबले ज्यादा ताकतवर व समर्थ होता है । जैसे हम किसी भी व्यक्ति को कई वर्ष के बाद देखते हैं । तो हम उसमें काफी बदलाव देखते हैं । उसके चेहरे व  रंग- रूप आदि में काफी बदलाव मिलता है । यदि कोई व्यक्ति ऊपर वर्णित नियमों का सही रूप से पालन करता है । तो निश्चित तौर से उसका शरीर पहले से ज्यादा समर्थ व ऊर्जावान होगा । और यदि कोई इन नियमों का पालन सही तरीके से नहीं करता है और अहितकारी नियम अपनाता है । तो उसके शरीर में समय से पहले ही बुढ़ापे जैसे लक्षण दिखाई देने लग जाते हैं ।

यहाँ पर प्रकृति की पूर्णता की बात कही गई है । पंच भूत ( आकाश, वायु, अग्नि, जल व पृथ्वी ) इस प्रकृति के महत्वपूर्ण घटक हैं । और इन्हीं पंच भूतों से हमारे शरीर का निर्माण भी हुआ है । योगाभ्यास द्वारा योगी रजोगुण व तमोगुण का अभाव करके सत्त्वगुण को निरन्तर बढ़ाता रहता है । इससे योगी के शरीर, मन, चित्त व इन्द्रियों में बहुत ज्यादा सामर्थ्यता आ जाती है । और वह पहले से ज्यादा शक्ति व ऊर्जा का अनुभव करता है ।

इस प्रकार शरीर, मन, चित व इन्द्रियों में जो परिवर्तन होता है । उससे योगी को  एक नए व समर्थ शरीर की प्राप्ति होती है । इसे ही जात्यन्तर परिणाम कहते हैं ।

Reader discussion

Comments (5)

These comments have been preserved from the original Dr. Somveer Yoga website.

  1. Lata sudhir baisane

    Dhanyawad.

  2. Anju siwach

    Thank you sir

  3. aashish malhan

    Guru ji nice explain about jatyater parinam.

  4. Teerbala

    thanq so much Sir good knowledge

  5. Anshu

    ??प्रणाम आचार्य जी! सुन्दर सूत्र! धन्यवाद! ओम ?