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Yog Darshan

Yog Sutra 4 - 10

अध्याय 4: कैवल्यपाद

मूल सूत्र · 4.10

तासामनादित्वं चाशिषो नित्यत्वात् ।। 10 ।।

शब्दार्थ

आशिष: ( जीवित रहने की इच्छा का ) नित्यत्वात् ( सदा बने रहने से ) तासाम् ( उन सभी संस्कारों अथवा वासनाओं का ) अनादित्वं ( प्रवाह आदि काल से ) ( ही है )

सूत्रार्थ

जीवन को जीने की लालसा या इच्छा का सदा बने रहने से उन वासना रूपी संस्कारों का प्रवाह आदिकाल से ही  निरन्तर चलता रहता है ।

व्याख्या

इस सूत्र में वासना का निरन्तर बने रहने का कारण जीने की इच्छा को बताया है ।

जिसका जन्म हुआ है उसकी मृत्यु होना भी निश्चित है । यह सनातन सत्य है । लेकिन इसके बावजूद भी लोग सदा जीवित रहने की लालसा को मन में पाले बैठे रहते हैं । कोई यह नहीं चाहता कि मेरा कभी भी अन्त हो । यह सदा जीवित रहने की लालसा ही कर्म संस्कारों का मूल है ।

कोई भी जीव क्यों न हो सभी को मृत्यु से भय लगा रहता है । चाहे कोई धनवान हो या निर्धन जैसे ही उनके प्राण संकट में आते हैं । वैसे ही वह झटपटाना ( तड़पना ) शुरू कर देते हैं । उनके चेहरे का रंग फीका पड़ जाता है । डर के मारे शरीर में कम्पन होना शुरू हो जाती है ।  फिर चाहे वह इन्सान हो या जानवर । सभी  मृत्यु से भयभीत रहते हैं । इसे ही अभिनिवेश नामक क्लेश कहा गया है ।

अब प्रश्न उठता है कि ऐसा क्यों होता है कि सभी प्राणी मृत्यु के नाम से डरते हैं ? इसका हल हमें पिछले सूत्र में मिलता है । पिछले सूत्र में बताया गया था कि हमारे अन्दर पूर्व जन्म की स्मृति व संस्कार सूक्ष्म रूप से विद्यमान रहते हैं । उन स्मृतियों व संस्कारों में हमारी

मृत्यु के भी संस्कार मौजूद होते हैं । तभी मृत्यु का आभास होने मात्र से ही हमारे अन्दर भय का माहौल उत्पन्न हो जाता है । क्योंकि जब इससे पूर्व जन्म में हमारी मृत्यु हुई होगी तब हमें जो पीड़ा या दुःख हुआ होगा । उसी दुःख व पीड़ा के संस्कार पुनः जीवित हो उठते हैं । जिससे हम भयभीत हो जाते हैं ।

इस प्रकार जीवन के प्रति प्रेम और मृत्यु के प्रति भय की कामना होने से ही वासनाओं का प्रवाह अनादि काल से चलता आ रहा है ।

Reader discussion

Comments (3)

These comments have been preserved from the original Dr. Somveer Yoga website.

  1. Anshu

    ?प्रणाम आचार्य जी! अभिनिवेश के कारण का बहुत ही तार्किक सत्य आपने उजागर किया है ! इस माग॔दश॔न के लिए आपका आभार आचार्य जी! सुन्दर! ओम

  2. Lata sudhir baisane

    Dhanyawad.

  3. Anju siwach

    Thank you sir