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Yog Darshan

Yog Sutra 4 - 30

अध्याय 4: कैवल्यपाद

मूल सूत्र · 4.30

तत: क्लेशकर्मनिवृत्ति: ।। 30 ।।

शब्दार्थ

तत: ( उस अर्थात उस धर्ममेघ नामक समाधि से ) क्लेश ( अविद्या आदि पंच क्लेशों व ) कर्म ( कर्म संस्कारों की ) निवृत्ति: ( समाप्ति हो जाती है )

सूत्रार्थ

उस धर्ममेघ नामक समाधि के प्राप्त होने से योगी के सभी अविद्या आदि पंच क्लेश और शुभ, अशुभ व मिश्रित कर्म समाप्त हो जाते हैं ।

व्याख्या

इस सूत्र में धर्ममेघ समाधि से मिलने वाले फल की चर्चा की गई है ।

हमारे जन्म के पीछे सबसे बड़ा कारण अविद्या रूपी क्लेश है । इस अविद्या के चलते ही मनुष्य जन्म - मरण के चक्रव्यूह में निरन्तर घूमता रहता है । यह अविद्या ही बाकी के सभी क्लेशों का आधार होती है । लेकिन जब साधक निरन्तर योग साधना करके समाधि की सर्वोच्च अवस्था अर्थात धर्ममेघ नामक समाधि को प्राप्त कर लेता है । तब उसके अविद्या आदि सभी क्लेश पूरी तरह से समाप्त हो जाते हैं । वह क्लेश लेशमात्र भी शेष नहीं बचते ।

इसके साथ ही मनुष्य के जितने भी सकाम कर्म होते हैं । वह भी पूरी तरह से समाप्त हो जाते हैं । योगसूत्र में चार प्रकार के कर्म की चर्चा की गई है । जो इस प्रकार हैं :- 1. शुक्ल कर्म ( शुभ कर्म ) 2. कृष्ण कर्म ( अशुभ कर्म ) 3. शुक्ल- कृष्ण कर्म ( शुभाशुभ अथवा मिश्रित कर्म ) व 4. अशुक्ल- अकृष्ण कर्म ( शुभ व अशुभ से रहित ) ।

इन सभी कर्मों में से पहले तीन प्रकार के कर्मों ( शुक्ल, कृष्ण व शुक्ल- कृष्ण ) को छोड़कर केवल अशुक्ल- अकृष्ण कर्म ( शुभ व अशुभ से रहित कर्म ) ही योगी के कर्म होते हैं । इस धर्ममेघ नामक समाधि के परिणाम स्वरूप योगी के ऊपर वर्णित तीनों कर्मों  ( शुक्ल, कृष्ण व शुक्ल- कृष्ण ) की निवृत्ति ( समाप्ति ) हो जाती है । और केवल अशुक्ल- अकृष्ण कर्म अर्थात पाप व पुण्य से रहित कर्म ही शेष बचते हैं ।

इस प्रकार जब योगी के अविद्या आदि क्लेश और सकाम कर्मों की निवृत्ति हो जाने पर वह इसी जीवन में विमुक्त ( सभी बन्धनों से मुक्त ) हो जाता है । इस प्रकार अविद्या आदि क्लेशों के समाप्त होने पर कोई भी योगी पुनः जन्म नहीं लेता । वह पूरी तरह से जीवन- मरण के बन्धन से मुक्त हो जाता है ।

Reader discussion

Comments (3)

These comments have been preserved from the original Dr. Somveer Yoga website.

  1. Nisha bhardwaj

    Thanku sir??

  2. Lata sudhir baisane

    Dhanyawad.

  3. Aashish malhan

    Nice guru ji.