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Yog Darshan

Yog Sutra 3 - 36

अध्याय 3: विभूतिपाद

मूल सूत्र · 3.36

तत: प्रातिभश्रावणवेदनादर्शा स्वादवार्ता जायन्ते ।। 36 ।।

शब्दार्थ

तत: ( उससे अर्थात उस संयम से ) प्रातिभ ( दूर व छिपी हुई वस्तुओं का ज्ञान ) श्रावण ( दिव्य श्रवण ) वेदन ( दिव्य स्पर्श ) आदर्श ( दिव्य दर्शन ) आस्वाद ( दिव्य स्वाद ) वार्ता ( दिव्य गन्ध ) जायन्ते ( उत्पन्न या पैदा होती हैं )

सूत्रार्थ

उस पुरुष में संयम करने से प्रातिभ, श्रावण, वेदन, आदर्श, आस्वाद व वार्ता जैसी सिद्धियाँ उत्पन्न होती हैं ।

व्याख्या

इस सूत्र में पुरुष में संयम करने से उत्पन्न होने वाली सिद्धियों का वर्णन किया गया है ।

पुरुष में संयम करने से योगी आत्मा का साक्षात्कार कर लेता है । इसके साथ ही योगी को छ: प्रकार की सिद्धियों की भी प्राप्ति होती हैं । जिनका वर्णन इस प्रकार है :-

  1. प्रातिभ
  2. श्रावण
  3. वेदन
  4. आदर्श
  5. आस्वाद
  6. वार्ता
  1. प्रातिभ :- प्रातिभ ज्ञान वह होता है जिसमें योगी अपने से दूर स्थित व आवरण अर्थात छिपी हुई वस्तुओं को भी आसानी से देख लेता है । यह एक प्रकार की सिद्धि होती है । जिसका वर्णन हम इसी पाद के तैतीसवें (33) सूत्र में कर चुके हैं ।
  2. श्रावण :- श्रावण का अर्थ होता है सुनना । यह दूसरी सिद्धि कही गई है । जिसमें योगी साधक को दिव्य शब्द सुनाई देते हैं ।
  3. वेदन :- वेदन का अर्थ होता है स्पर्श का अनुभव करना । वेदन नामक सिद्धि से योगी को दिव्य स्पर्श का अनुभव होता है ।
  4. आदर्श :- आदर्श का अर्थ है रूप अर्थात देखना । इसके सिद्ध होने से योगी को दिव्य दृष्टि की प्राप्ति होती है । जिसके कारण उसमें दिव्य दर्शन ( देखने की ) करने की क्षमता आ जाती है ।
  5. आस्वाद :- आस्वाद का अर्थ होता है खट्टा, मीठा, तीखा आदि रस का अनुभव करना । इस सिद्धि से योगी को दिव्य रसों की प्राप्ति होती है ।
  6. वार्ता :- वार्ता का अर्थ होता है गन्ध । जैसे हम जो भी अच्छी या बुरी गन्ध सूंघते हैं । वार्ता सिद्धि के बाद साधक को दिव्य गन्ध की प्राप्ति होती है ।

इस प्रकार साधक को पुरुष में संयम करने से आत्मा का ज्ञान व इन सिद्धियों की प्राप्ति नित्य अर्थात प्रतिदिन होती है ।

Reader discussion

Comments (5)

These comments have been preserved from the original Dr. Somveer Yoga website.

  1. Nisha bhardwaj

    Thanku sir☺☺

  2. aashish malhan

    Guru ji nice explain about benefit of sayama.

  3. आलोक कुमार पटवा

    ॐ गुरुदेव।

    आपका बहुत बहुत आभार।

  4. Priyanka Atreya

    Pranaam Sir! ??thank you so much for this detailed information

  5. Anshu

    ??प्रणाम आचार्य जी! सुन्दर सूत्र! गहन वण॔न! धन्यवाद! ओम ??