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Yog Darshan

Yog Sutra 3 - 10

अध्याय 3: विभूतिपाद

मूल सूत्र · 3.10

तस्य प्रशान्तवाहिता संस्कारात् ।। 10 ।।

शब्दार्थ

संस्करात् ( संस्कारों के प्रभाव से ) तस्य ( उसकी अर्थात चित्त की ) वाहिता ( स्थिति या अवस्था ) प्रशान्त ( बिलकुल शान्त होती है । )

सूत्रार्थ

संस्कारो के प्रभाव से चित्त की स्थिति बिलकुल शान्त हो जाती है । अर्थात उस अवस्था में हमार चित्त शान्त गति के प्रवाह में प्रवाहित होता रहता है ।

व्याख्या

इस सूत्र में चित्त की निरोध अवस्था का वर्णन किया गया है ।

जब हमारा चित्त व्युत्थान संस्कारों से युक्त होता है तो उस समय चित्त की दशा पूरी तरह से अस्थिर होती है । और जैसे ही चित्त निरोध संस्कारों से युक्त होता है तो उस समय चित्त की दशा अथवा स्थिति बिलकुल स्थिर एवं शान्त होती है ।

व्युत्थान काल में चित्त में रजोगुण का प्रभाव बढ़ जाता है । जिससे चित्त अस्थिरता वाला हो जाता है । और निरोध काल में चित्त में सत्त्वगुण का प्रभाव बढ़ने से वह बिलकुल शान्त व स्थिर अवस्था वाला हो जाता है । जिस प्रकार हवा के रुकने से तालाब का पानी एकदम शान्त हो जाता है । उसमें किसी तरह की कोई हलचल नहीं होती है ।

इसको हम अन्य उदाहरण के माध्यम से भी समझ सकते हैं -  जब भी हम किसी खुली जगह पर अग्नि जलाते हैं तो वह अग्नि कभी तेज हो जाती है तो कभी मन्द । कभी उसमें से धुआँ भी निकलने लगता है । अग्नि की यह जो अवस्था है वही अवस्था व्युत्थान काल में चित्त की होती है ।

और जब वह अग्नि पूरी तरह से बुझ चुकी होती है । उस समय न ही तो उसमें किसी प्रकार की तपिश ( गर्मी ) होती है और न ही किसी प्रकार का धुआँ । अग्नि के बुझने के बाद कि यह जो अवस्था होती है ठीक वैसी ही अवस्था चित्त की निरोध काल में होती है ।

इस प्रकार निरोध संस्कारों के अच्छे अभ्यास से ही चित्त की स्थिति एकदम शान्त होती है । जैसे ही निरोध संस्कार का प्रभाव कम होता है वैसे ही व्युत्थान संस्कारों का प्रभाव बढ़ जाता है । अर्थात एक समय पर चित्त की एक ही अवस्था हो सकती है । जब चित्त व्युत्थान अवस्था में होगा तो निरोध अवस्था दब जाएगी और यदि निरोध अवस्था प्रबल होगी तो व्युत्थान अवस्था कमजोर हो जाएगी ।

Reader discussion

Comments (6)

These comments have been preserved from the original Dr. Somveer Yoga website.

  1. Nisha

    Thanku so much sir??

  2. Anshu

    ?Prnam Aacharya ji! This knowledge is beautiful because with these lessons you really make our souls pure and peaceful. . And restrain us from the wrong way. . You are like a real Guru of the Era and an angel of God. .हे रामरतेय Prnam again and again. .Om ?

  3. Naresh Kumar Arya

    Vayuthan or Niroth ka meaning Btane ka kasht karen

  4. राज कुमार साध

    पूर्णतः सहमत श्रीमान जी, बहुत ही उमदा उदाहरण दिए हैं।

  5. आलोक कुमार पटवा

    ॐ गुरुदेव*

    निरोध अवस्था का अति सुन्दर

    व्याख्या प्रस्तुत की है आपने।

    इसके लिए आपको बहुत बहुत आभार।

  6. aashish malhan

    Guru ji nice explanation about chitta different phases.