Skip to content

Hatha Pradipika

Hatha Pradipika Ch. 3 [55-60] - Uddiyan Bandha

अध्याय 3: मुद्रा

उड्डीयान बन्ध

मूल श्लोक · 3.55

बद्धो येन सुषुम्नायां प्राण स्तूड्डीयते यत: । तस्मादुड्डीयनाख्योऽयं योगिभि: समुदाहृत: ।। 55 ।।

भावार्थ

रुके हुए प्राण को ऊपर की ओर सुषुम्ना नाड़ी में ले जाने के कारण ही योगियों ने इस विधि को उड्डीयान बन्ध कहा है ।

मूल श्लोक · 3.56

उड्डीनं कुरुते यस्मादविश्रान्तं महाखग: । उड्डीयानं तदेव स्यात्तत्र बन्धोऽभिधीयते ।। 56 ।।

भावार्थ

जिस विधि से प्राण का प्रवाह आकाश अर्थात् निरन्तर ऊपर की ओर प्रवाहित होता रहता है । उसी योग क्रिया को उड्डीयान बन्ध कहते हैं । प्राण को उर्ध्वगामी बनाने के लिए ही उड्डीयान बन्ध का अभ्यास किया जाता है ।

उड्डीयान बन्ध विधि

मूल श्लोक · 3.57

उदरे पश्चिमं तानं नाभेरूर्ध्वं च कारयेत् । उड्डीयानो ह्यसौ बन्धौ मृत्युमातङ्गकेसरी ।। 57 ।।

भावार्थ

पेट के नाभि से ऊपर वाले हिस्से को अपनी रीढ़ की तरफ खींचना ही उड्डीयान बन्ध कहलाता है । यह मृत्यु रूपी हाथी के आगे सिंह अर्थात् शेर के समान है । इसके अभ्यास से साधक मृत्यु पर विजय प्राप्त कर लेता है ।

विशेष

श्वास को बाहर निकाल कर पेट को खाली कर लें । इसके बाद पेट को सामर्थ्य के अनुसार कमर की ओर खीचना चाहिए । यह विधि उड्डीयान बन्ध कहलाती है ।

उड्डीयान बन्ध लाभ

मूल श्लोक · 3.58

उड्डीयानं तु सहजं गुरुणा कथितं यथा । अभ्यसेत् सततं यस्तु वृद्धोऽपि तरुणायते ।। 58 ।।

भावार्थ

गुरु द्वारा बताई गई इस सहज विधि ( उड्डीयान बन्ध ) का विधिपूर्वक अभ्यास करने से बुढ़ा व्यक्ति भी पुनः युवा ( जवान ) हो जाता है ।

मूल श्लोक · 3.59

नाभेरूर्ध्वमधश्चापि तानं कुर्यात् प्रयत्नत: । षण्माससमभ्यसेन्मृत्युं जयत्येव न संशय: ।। 59 ।।

भावार्थ

नियमित रूप से पूरे प्रयास के साथ नाभि के ऊपर व नीचे के भाग को पीठ की ओर खींचने से ( उड्डीयान बन्ध ) योगी साधक छः महीने में ही मृत्यु पर विजय प्राप्त कर लेता है । इसमें किसी प्रकार का कोई सन्देह नहीं है ।

मूल श्लोक · 3.60

सर्वेषामेव बन्धानामुत्तमो ह्युड्डियानक: । उड्डीयाने दृढे बद्धे मुक्ति: स्वाभाविकी भवेत् ।। 60 ।।

भावार्थ

यह उड्डीयान बन्ध बाकी सभी बन्धों में सबसे श्रेष्ठ है । उड्डीयान बन्ध के सिद्ध होने पर स्वभाविक रूप से मोक्ष की प्राप्ति हो जाती है ।

Reader discussion

Comments (5)

These comments have been preserved from the original Dr. Somveer Yoga website.

  1. Nisha bhardwaj

    Thanku sir ??

  2. Pooja yadav

    Thanks sir?

  3. आलोक कुमार पटवा

    ॐ गुरुदेव*

    आपका हृदय से आभार।

  4. vaidyaDeshBandhuBaghel

    Abhar guru dev

  5. vaidyaDeshBandhuBaghel

    Nice