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Hatha Pradipika

Hatha Pradipika Ch. 3 [19-24]

अध्याय 3: मुद्रा

महाबन्ध वर्णन

मूल श्लोक · 3.19

पाषि्र्ण वामस्य पादस्य योनिस्थाने नियोजयेत् । वामोरूपरि संस्थाप्य दक्षिणं चरणं तथा ।। 19 ।।

मूल श्लोक · 3.20

पूरयित्वा ततो वायुं हृदये चिबुकं दृढम् । निष्पीड्य योनिमाकुंच्य मनोमध्ये नियोजयेत् ।। 20 ।।

भावार्थ

बायें पैर की एड़ी को सीवनी प्रदेश ( योनि स्थान ) पर अच्छे से टिका दें । दायें पैर को बायीं जंघा पर रखें । अब प्राणवायु को शरीर के अन्दर भरकर ठुड्ढी को मजबूती के साथ छाती पर लगाएं । ( जालन्धर बन्ध लगाएं ) साथ ही योनिस्थान का आकुंचन करें अर्थात मूलबन्ध का प्रयोग करते हुए मन को सुषुम्ना नाड़ी में लगाना चाहिए ।

मूल श्लोक · 3.21

धारयित्वा यथाशक्ति रेचयेदनिलं शनै: । सव्याङ्गे तु समभ्यस्य दक्षाङ्गे पुनरभ्यसेत् ।। 21 ।।

भावार्थ

जालन्धर बन्ध को हटाते हुए शरीर के अन्दर रोकी हुई प्राणवायु को धीरे- धीरे बाहर निकाले । इस प्रकार बायीं तरफ से इसका अभ्यास करने के बाद पुनः दायीं ओर से भी इसका उसी प्रकार से अभ्यास करें ।

जालन्धर बन्ध के विषय में सुझाव

मूल श्लोक · 3.22

मतमत्र तु केषाञ्चित् कण्ठबन्धं विवर्जयेत् । राजदन्तस्थ जिह्वाया बन्ध: शस्तो भवेदिति ।। 22 ।।

भावार्थ

यहाँ पर कुछ विद्वानों का यह मानना है कि महाबन्ध का अभ्यास करते हुए इसमें जालन्धर बन्ध को न लगाकर उसकी जगह पर जिह्वा ( जीभ ) को मुख्य दाँतो अर्थात आगे वाले दाँतो के साथ लगाना ज्यादा उचित है ।

महाबन्ध से महासिद्धि की प्राप्ति

मूल श्लोक · 3.23

अयन्तु सर्वनाडीनामूर्ध्वं गतिनिरोधक: । अयं खलु महाबन्धो महासिद्धि प्रदायक: ।। 23 ।।

भावार्थ

यह महाबन्ध सभी नाड़ियों की ऊपर की ओर प्रवाहित होने वाली गति को रोकता है । जिससे निश्चित रूप से यह महाबन्ध साधक को महान सिद्धियाँ प्रदान करवाने वाला होता है ।

महाबन्ध का फल

मूल श्लोक · 3.24

कालपाशमहाबन्धविमोचनविचक्षण: । त्रिवेणीसङ्गमं धत्ते केदारं प्रापयेन्मन: ।। 24 ।।

भावार्थ

यह महाबन्ध साधक को मृत्यु रूपी बन्धन से मुक्ति प्रदान करवाने वाला है । साथ ही यह इडा, पिङ्गला व सुषुम्ना नाड़ियों का संगम करवाता है और मन को शिव स्थान अर्थात आज्ञा चक्र में स्थिर करता है ।

Reader discussion

Comments (5)

These comments have been preserved from the original Dr. Somveer Yoga website.

  1. Nisha bhardwaj

    Thanku sir ??

  2. Mamta

    Thanks again sir

  3. Anju siwach

    Thank you sir

  4. Lata Sudhir Baisane

    धन्यवाद।

  5. Shyam Saraswat

    Thank you sir