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Hatha Pradipika

Hatha Pradipika Ch. 3 [32-37]

अध्याय 3: मुद्रा

खेचरी मुद्रा वर्णन

मूल श्लोक · 3.32

कपालकुहरे जिह्वा प्रविष्टा विपरीतगा । भ्रुवोरन्तर्गता दृष्टिर्मुद्रा भवति खेचरी ।। 32 ।।

भावार्थ

अपनी जिह्वा को उल्टी करके गले में स्थित तालु प्रदेश के छिद्र में प्रविष्ट ( डाल ) कराकर दृष्टि को भ्रूमध्य ( दोनों भौहों ) के बीच में स्थिर करना खेचरी मुद्रा होती है ।

मूल श्लोक · 3.33

छेदनचालनदोहै: कलां क्रमेण वर्धयेत्तावत् । सा यावद्भ्रूमध्यं स्पृशति तदा खेचरी सिद्धि: ।। 33 ।।

भावार्थ

अपनी जीभ को काटना, उसको आगे- पीछे चलाना और उसका दोहन अर्थात् उसे पकड़ कर खीचना आदि क्रियाओं का अभ्यास तब तक करते रहना चाहिए जब तक कि जीभ दोनों भौहों के बीच के भाग को न छू ले । ऐसा करने से ही खेचरी मुद्रा सिद्ध होती है ।

मूल श्लोक · 3.34

स्नुहीपत्रनिभं शस्त्रं सुतीक्ष्णं स्निग्धनिर्मलम् । समादाय ततस्तेन रोममात्रं समुच्छिनेत् ।। 34 ।।

मूल श्लोक · 3.35

तत: सैन्धवपथ्याभ्यां चूर्णिताभ्यां प्रघर्षयेत् । पुनः सप्तदिने प्राप्ते रोम मात्रं समुच्छिनेत् ।। 35 ।।

मूल श्लोक · 3.36

एवं क्रमेण षण्मासं नित्ययुक्त:समाचरेत् । षण्मासाद्रसनामूलशिराबन्ध: पर्णश्यति ।। 36 ।।

भावार्थ

स्नुही ( थुअर ) के पत्ते समान तेज धारवाला, चिकना, कीटाणु रहित अर्थात पूर्ण स्वच्छ शस्त्र ( हथियार ) लेकर, जीभ के मूल भाग ( जीभ को उल्टा करने पर जो पतली खाल दिखाई देती है ) को रोमछिद्र के बाल की मोटाई जितने भाग को काटें । इसके बाद सेंधा नमक व हरड़ के चूर्ण का अपनी जीभ के कटे हुए भाग पर घर्षण करें और सात दिन के बाद एक बार फिर से उस हिस्से को बाल के बराबर काटें ।

ऊपर वर्णित विधि का निरन्तर छह महीने तक अभ्यास करने से जीभ के मूल में स्थित बन्ध ( जिस भाग को प्रति सप्ताह काटा गया है ) पूरी तरह से हट जाता है । जिससे जीभ के संचालन में सरलता हो जाती है ।

व्योमचक्र

मूल श्लोक · 3.37

कलां पराङ्मुखीं कृत्वा त्रिपथे परियोजयेत् । सा भवेत् खेचरी मुद्रा व्योमचक्रं तदुच्यते ।। 37 ।।

भावार्थ

अपनी जीभ को उल्टी करके तालु प्रदेश के मूल में स्थित छिद्र ( जहाँ पर तीनों नाडियों का संगम होता है ) में लगाने से खेचरी मुद्रा कहलाती है । तालु प्रदेश के मूल भाग में स्थित वह छिद्र व्योमचक्र कहलाता है ।

विशेष

तालु में स्थित छिद्र को व्योमचक्र कहते हैं । यह परीक्षा की दृष्टि से उपयोगी है ।

Reader discussion

Comments (3)

These comments have been preserved from the original Dr. Somveer Yoga website.

  1. Pooja yadav

    Special thanks for last point exam ki dristi se?

  2. आलोक कुमार पटवा

    ॐ गुरुदेव*

    आपका हृदय से परम आभार।

  3. Lata Sudhir Baisane

    धन्यवाद।