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Hatha Pradipika

Hatha Pradipika Ch. 3 [30-31]

अध्याय 3: मुद्रा

मूल श्लोक · 3.30

एतत् त्रयं महागुह्यं जरामृत्युविनाशमम् । वह्निवृद्धिकरं चैव ह्यणिमादिगुणप्रदम् ।। 30 ।।

भावार्थ

महाबन्ध, महामुद्रा और महावेध मुद्राओं को पूरी तरह से गुप्त रखना चाहिए । इनका अभ्यास बुढ़ापा व मृत्यु को दूर करता है । जठराग्नि को मजबूत करती हैं । साथ ही अणिमा आदि सिद्धियाँ प्रदान करती हैं ।

मूल श्लोक · 3.31

अष्टधा क्रियते चैव यामे यामे दिने दिने । पुण्यसंभारसंधायि पापौघभिदुरं सदा । सम्यक् शिक्षावतामेवं स्वल्पं प्रथमसाधनम् ।। 31 ।।

भावार्थ

साधक को इन मुद्राओं का अभ्यास दिनभर में आठ बार करना चाहिए । यह साधकों के सभी प्रकार के पाप नष्ट करके उसे पुण्य प्रदान करने वाली होती हैं । अच्छे व बुद्धिमान साधकों को शुरुआती समय में इनका अभ्यास कम मात्रा में ( थोड़े समय तक ) करना चाहिए ।

Reader discussion

Comments (3)

These comments have been preserved from the original Dr. Somveer Yoga website.

  1. Neelam

    Thank you sir

  2. लक्ष्मी नारायण योग शिक्षक पतंजलि योगपीठ हरिव्दार ।l

    ऊॅ सर जी ! महाबन्ध ,महामुद्रा , महावेध इनके विषय मे और विस्तार से जानने की इच्छा है सर ।

  3. Lata Sudhir Baisane

    धन्यवाद।