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Hatha Pradipika

Hatha Pradipika Ch. 3 [38-43]

अध्याय 3: मुद्रा

खेचरी मुद्रा के लाभ

मूल श्लोक · 3.38

रसनामूर्ध्वगां कृत्वा क्षणार्धमपि तिष्ठति । विषैर्विमुच्यते योगी व्याधिमृत्युजरादिभि: ।। 38 ।।

भावार्थ

जो साधक अपनी जीभ को ऊपर ले जाकर दोनों भौहों के बीच में आधे क्षण भी लगाकर रखता है तो वह अनेक प्रकार के विषों, रोगों, मृत्यु व बुढ़ापे आदि से मुक्त हो जाता है । यह सभी बाधाएँ उसे प्रभावित नहीं कर पाती हैं ।

मूल श्लोक · 3.39

न रोगो मरणं तन्द्रा न निद्रा न क्षुधा तृषा । न च मूर्च्छा भवेत्तस्य यो मुद्रां वेत्ति खेचरीम् ।। 39 ।।

भावार्थ

खेचरी मुद्रा का अभ्यास करने वाले साधक को न तो कभी कोई रोग होता है, न उसकी मृत्यु होती है, न उसमें मानसिक शिथिलता आती है, न उसे नींद बाधित करती है, न उसे कभी भूख- प्यास परेशान करती है और न ही उसे कभी बेहोशी आती है ।

मूल श्लोक · 3.40

पीड्यते न स रोगेण लिप्यते न च कर्मणा । बाध्यते न स कालेन यो मुद्रां वेत्ति खेचरीम् ।। 40 ।।

भावार्थ

खेचरी को जानने वाला साधक कभी भी रोगों से पीड़ित नहीं होता । न वह कर्मों के बन्धन में फंसता है और न ही उसे कभी मृत्यु अपने वश में कर पाती है ।

मूल श्लोक · 3.41

चित्तं चरति खे यस्माज्जिह्वा चरति खे गता । तेनैषा खेचरी नाम मुद्रा सिद्धैर्निरूपिता ।। 41 ।।

भावार्थ

इस खेचरी मुद्रा का अभ्यास करने से साधक का चित्त हृदय आकाश में स्थित हो जाता है अर्थात् वह शून्य भाव में रहता है । जीभ व्योमचक्र में स्थित हो जाती है । इसलिए सिद्ध योगी इसे खेचरी मुद्रा कहते हैं ।

बिन्दु ( वीर्य ) पर पूर्ण नियन्त्रण

मूल श्लोक · 3.42

खेचर्या मुद्रितं येन विवरं लम्बिकोर्ध्वत: । न तस्य क्षरते बिन्दु: कामिन्याश्लेषितस्य च ।। 42 ।।

मूल श्लोक · 3.43

चलितोऽपि यदा बिन्दु: सम्प्राप्तो योनिमण्डलम् । व्रजत्यूर्ध्वं हृत: शक्तया निबद्धो योनिमुद्रया ।। 43 ।।

भावार्थ

जिस भी साधक ने खेचरी मुद्रा के अभ्यास द्वारा अपने तालु प्रदेश में स्थित व्योमचक्र के छिद्र को बन्द कर दिया है । उसका बिन्दु अर्थात् वीर्य अत्यन्त कामुक ( काम वासना से परिपूर्ण ) स्त्री के आलिङ्गन करने पर भी स्खलित ( बाहर / नष्ट ) नहीं होता । और यदि वह वीर्य स्खलित होकर स्त्री की योनि में पहुँच भी जाए तो भी साधक द्वारा योनिमुद्रा की शक्ति से उसे पुनः ऊपर खींच लिया जाता है ।

Reader discussion

Comments (4)

These comments have been preserved from the original Dr. Somveer Yoga website.

  1. Neelam

    Nice

  2. Anju siwach

    Thank you sir

  3. Pooja yadav

    इस मुद्रा का ज्ञान देने के लिए मेरे आदर्श आचार्य का बहुत बहुत आभार।?

  4. Lata Sudhir Baisane

    धन्यवाद।