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Gheranda Samhita

Gheranda Samhita Ch. 5 [83-85]

अध्याय 5: प्राणायाम

मूर्छा प्राणायाम विधि व लाभ

मूल श्लोक · 5.83

सुखेन कुम्भकं कृत्वा मनश्च भ्रुवोरन्तरम् । सन्त्यज्य विषयान् सर्वान् मनोमूर्च्छा सुखप्रदा । आत्मनि मनसो योगादानन्दो जायते ध्रुवम् ।। 83 ।।

भावार्थ

सभी विषयों को छोड़कर सुखपूर्वक श्वास को रोकते हुए अपने मन को दोनों भौहों के बीच में सुखपूर्वक लगाना ही मनोमूर्च्छा प्राणायाम होता है ।

जब आत्मा और मन का आपस में योग अर्थात् मिलन हो जाता है तो वह निश्चित रूप से आनन्द की स्थिति कहलाती है ।

विशेष

मूर्च्छा प्राणायाम से किसकी प्राप्ति होती है ? उत्तर है परम आनन्द की । मूर्च्छा प्राणायाम में मन को कहाँ पर स्थित ( लगाते ) करते हैं ? उत्तर दोनों भौहों के बीच में ।

केवली प्राणायाम वर्णन

मूल श्लोक · 5.84

हङ्कारेण बहिर्याति सकारेण विशेत् पुनः । षट्शतानि दिवारात्रौ सहस्त्राण्येक विंशति: । अजपां नाम गायत्रीं जीवो जपति सर्वदा ।। 84 ।।

भावार्थ

‘हं’ शब्द की ध्वनि के साथ प्राणवायु शरीर के अन्दर प्रवेश करती है और ‘स’ शब्द की ध्वनि के साथ प्राणवायु शरीर से बाहर निकलती है । इस प्रकार  मनुष्य एक दिन ( दिन व रात ) में इक्कीस हजार छ: सौ ( 21600 ) बार इस अजपा नामक गायत्री का जप करता है ।

विशेष

प्राणवायु किस शब्द की ध्वनि के साथ शरीर के अन्दर प्रवेश करता है ? उत्तर ‘हं’ शब्द की ध्वनि के साथ । किस ध्वनि के साथ प्राणवायु शरीर से बाहर निकलती है ? उत्तर है ‘स’ की ध्वनि के साथ । पूरे एक दिन अर्थात् दिन व रात में मनुष्य कितनी बार अजपा जप गायत्री का जप करता है ? उत्तर है इक्कीस हजार छ: सौ ( 21600 )

मूल श्लोक · 5.85

मूलाधारे यथा हंसस्तथा हि हृदि पंकजे । तथा नासापुटद्वन्द्वे त्रिविधं संगमागम् ।। 85 ।।

भावार्थ

ऊपर वर्णित ‘हंस’ ( हं व स ) का आवागमन मूलाधार चक्र में, हृदय प्रदेश में व दोनों नासिका छिद्रों अर्थात् इन तीनों के संगम से होकर आता- जाता है ।

विशेष

हंस की ध्वनि का आवागमन कहा- कहा से होता है ? उत्तर मूलाधार, हृदय प्रदेश व दोनों नासिका छिद्रों से ।

Reader discussion

Comments (5)

These comments have been preserved from the original Dr. Somveer Yoga website.

  1. Aashish malhan

    Dr sahab nice explain about hansa sound.

  2. Mamta

    Thanks again sir

  3. Narendra Kumar Chowdhary

    My dear Dr. Sahab thanks for regular supply of study material. I think little mistake in explanation of shlok no.84

    हम ध्वनि के साथ श्वास प्राणवायु शरीर के अंदर प्रवेश करती है और स ध्वनि के साथ प्रश्वास वायु शरीर से बाहर निकलती है। यह उल्टा हो गया लगता है। यानी स में प्राणवायु प्रवेश करती है और हम में बाहर निकलती है, ऐसा होना चाहिए।तो कृपया ठीक करवाने का कष्ट करें। धन्यवाद।

  4. Neelam

    Correct

  5. आलोक कुमार पटवा

    ॐ गुरुदेव!

    अपजा हृदय से आभार।