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Gheranda Samhita

Gheranda Samhita Ch. 5 [8-15]

अध्याय 5: प्राणायाम

योगाभ्यास के लिए वर्जित काल समय

मूल श्लोक · 5.8

हेमन्ते शिशिरे ग्रीष्मे वर्षायां च ऋतौ तथा । योगारम्भं न कुर्वीत कृते योगो हि रोगाद: ।। 8 ।।

भावार्थ

साधक को हेमन्त, शिशिर, ग्रीष्म और वर्षा ऋतुओं में योग साधना का अभ्यास शुरू नहीं करना चाहिए । इन ऋतुओं में अभ्यास करने पर रोग होने की सम्भावना बढ़ जाती है ।

विशेष

साधक को किन- किन ऋतुओं में योग के अभ्यास को प्रारम्भ नहीं करना चाहिए ? जिसका उत्तर है हेमन्त, शिशिर, ग्रीष्म व वर्षा ऋतुओं में । इसके अलावा यह भी पूछा जा सकता है कि कितनी ऋतुओं में योगाभ्यास वर्जित होता है ? जिसका उत्तर है चार ।

योगाभ्यास के लिए उपयुक्त समय

मूल श्लोक · 5.9

वसन्ते शरदि प्रोक्तं योगारम्भं समाचरेत् । तथायोगी भवेत् सिद्धो रोगान्मुक्तो भवेद् ध्रुवम् ।। 9 ।।

भावार्थ

योग साधना के विषय में कहा गया है कि साधक को वसन्त व शरद ऋतु में योग साधना की शुरुआत करनी चाहिए । इस समय पर योग साधना की शुरुआत करने वाला योगी निश्चित रूप से रोग मुक्त व सिद्धि को प्राप्त करने वाला होता है ।

विशेष

किन- किन ऋतुओं में योग साधना को प्रारम्भ करना चाहिए ? उत्तर है वसन्त व शरद ऋतुओं में । वसन्त व शरद ऋतुओं में योग साधना प्रारम्भ करने से साधक को क्या लाभ मिलते हैं ? उत्तर है साधक रोग मुक्त व सिद्धि को प्राप्त कर लेता है ।

ऋतुओं का मास ( महीनों ) से सम्बन्ध

मूल श्लोक · 5.10

चैत्रादिफाल्गुनान्ते च माघादि फाल्गुननान्तिके । द्वौ द्वौ मासौ ऋतुभागौ अनुभावश्चतुश्चतु: ।। 10 ।।

भावार्थ

चैत्र मास से फाल्गुन मास के अन्त तक ( जिसमें माघ मास भी आता है ) दो- दो महीनों में एक ऋतु का समय पूरा होता है और चार- चार महीनों तक उन ऋतुओं का प्रभाव रहता है ।

विशेष

दो महीने में एक ऋतु का समय बताया गया है । हमारे भारत देश में एक वर्ष में कुल छः ऋतुएँ होती हैं । इससे भी स्पष्ट है कि एक ऋतु का समय दो महीने तक होता है ।

मूल श्लोक · 5.11

वसन्तश्चैत्र वैशाखौ ज्येष्ठाषाढ़ौ च ग्रीष्मकौ । वर्षा श्रावणभाद्राभ्यां शरदाश्विनकार्तिकौ । मार्गपौषौ च हेमन्त: शिशिरो माघ फल्गुनौ ।। 11 ।।

भावार्थ

चैत्र और वैशाख मास तक वसन्त ऋतु और ज्येष्ठ व आषाढ़ मास तक ग्रीष्म ऋतु होती है । श्रावण से भाद्रपद अर्थात् भादौ तक वर्षा ऋतु और आश्विन से कार्तिक मास तक शरद ऋतु अर्थात् सर्दी होती है । मार्गशीर्ष से पौष माह तक हेमन्त ऋतु और माघ से फाल्गुन मास तक शिशिर ऋतु होती है ।

विशेष

ऊपर वर्णित मास व ऋतु का सम्बन्ध परीक्षा की दृष्टि से उपयोगी है । इसे अच्छे से याद करें । आसानी के लिए अन्त में डायग्राम की सुविधा भी दी जा रही है ।

मूल श्लोक · 5.12

अनुभावं प्रवक्ष्यामि ऋतुनां च यथोदितम् । माघादिमाधवान्तेषु वसन्तानुभवश्चतु: ।। 12 ।।

भावार्थ

अब मैं जैसा ऋतुओं के विषय में अनुभव होता है, उसका उपदेश करूँगा । माघ मास से वैशाख मास के अन्त तक चार महीनों वसन्त ऋतु का अनुभव होता है ।

विशेष

माघ से वैशाख मास के अन्त तक किस ऋतु का प्रभाव होता है ? उत्तर है वसन्त ऋतु का ।

मूल श्लोक · 5.13

चैत्रादि चाषाढान्तं च निदाघानुभवश्चतु: । आषाढादि चाश्विनान्तं प्रावृषानुभवश्चतु: ।। 13 ।।

भावार्थ

इसी प्रकार चैत्र मास से लेकर आषाढ़ मास में चार महीने तक ग्रीष्म ऋतु का प्रभाव रहता है तथा आषाढ़ से आश्विन मास में चार महीने तक वर्षा ऋतु रहती है ।

विशेष

चैत्र से आषाढ़ तक किस ऋतु का प्रभाव रहता है ? उत्तर है ग्रीष्म अर्थात् गर्मी का । आषाढ़ मास से आश्विन मास तक किस ऋतु का प्रभाव पड़ता है ? उत्तर है वर्षा ऋतु का ।

मूल श्लोक · 5.14

भाद्रादिमार्गशीर्षान्तं शरदाऽनुभवश्चतु: । कार्तिकादिमाघमासान्तं हेमन्तानुभवश्चतु: । मार्गादिचतुरो मासान् शिशिरानुभवश्चतु: ।। 14 ।।

भावार्थ

भाद्रपद मास से मार्ग शीर्ष मास के अन्त तक चार महीने शरद ऋतु का प्रभाव रहता है, कार्तिक मास से माघ मास के अन्त तक चार महीने हेमन्त ऋतु का अनुभव होता है और मार्गशीर्ष मास से फाल्गुन मास तक चार महीने शिशिर ऋतु का प्रभाव रहता है ।

विशेष

परीक्षा की दृष्टि से ऊपर वर्णित मास व ऋतुओं का सम्बंध उपयोगी है ।

मूल श्लोक · 5.15

वसन्ते वापि शरदि योगारम्भं समाचरेत् । तदा योगो भवेत् सिद्धो विनायासेन कथ्यते ।। 15 ।।

भावार्थ

साधक को योग साधना की शुरुआत वसन्त या शरद ऋतु में करनी चाहिए । ऐसा करने से बिना किसी विशेष प्रयास के ही साधक को योग में सिद्धि प्राप्त हो जाती है ।

विशेष

किस - किस ऋतु में योगाभ्यास की शुरुआत करने से स्वयं ही सिद्धि की प्राप्ति हो जाती है ? अथवा किस- किस ऋतु में योगाभ्यास शुरू करने से बिना किसी विशेष प्रयास के अपने आप ही सिद्धि की प्राप्ति होती है ? उत्तर है वसन्त व शरद ऋतु में ।

Reader discussion

Comments (5)

These comments have been preserved from the original Dr. Somveer Yoga website.

  1. Aashish malhan

    Nice dr sahab.

  2. Neelam

    Well explained,thank you sir

  3. Lata baisane

    धन्यवाद।

  4. आलोक कुमार पटवा

    ॐ गुरुदेव!

    बहुत ही उत्तम व्याख्या प्रस्तुत की है आपने।

    अस्तु, आपको हृदय से आभार।

  5. रविकान्त आर्य

    बहुत सुंदर गुरुजी।

    पहला सार्थक प्रयास जो योग गर्न्थो और शात्रो के साक्ष्य के साथ आप अद्यतित जानकारी का भी समुचित प्रयोग कर रहे है।

    परमपिता परमेश्वर आपको आपका लक्ष्य प्राप्ति में सहायता प्रदान करें।

    ओ३म्