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Gheranda Samhita

Gheranda Samhita Ch. 7 [1-2]

अध्याय 7: समाधि

अध्याय परिचय

सातवां अध्याय ( समाधि योग )

घेरण्ड संहिता का यह अन्तिम अध्याय है । जिसमें महर्षि घेरण्ड ने अपने सप्तांग योग के अन्तिम अंग अर्थात् समाधि योग का वर्णन किया है । घेरण्ड संहिता के प्रत्येक अध्याय में योग के एक अंग का वर्णन किया गया है । जिसके अनुसार सात अध्यायों के माध्यम से इनका सप्तांग योग पूर्ण होता है । जिस प्रकार अन्य योग आचार्यों ने समाधि को योग के अन्तिम अंग के रूप माना है । ठीक उसी प्रकार इन्होंने भी समाधि को ही योग का अन्तिम अंग माना है । इन्होंने समाधि के छ: ( 6 ) प्रकार माने हैं । जिनमें क्रमशः ध्यानयोग समाधि, नादयोग समाधि, रसानन्द योग समाधि, लयसिद्धि योग समाधि, भक्तियोग समाधि व राजयोग का वर्णन मिलता है । समाधि योग के फल के रूप में साधक को निर्लिप्तता ( पूर्ण मुक्ति ) की प्राप्ति होती है । समाधि को सर्वोपरि मानते हुए महर्षि घेरण्ड कहते हैं कि यह साधना का अन्तिम पड़ाव है । इसके बाद साधक मुक्ति को प्राप्त हो जाता है । जिससे वह जन्म- मरण के क्रम से पूरी तरह मुक्त हो जाता है ।

मूल श्लोक · 7.1

समाधिश्च परो योगो बहुभाग्येन लभ्यते । गुरो: कृपा प्रसादेन प्राप्यते गुरुभक्तित: ।। 1 ।।

भावार्थ

यह समाधि नामक श्रेष्ठ योग बहुत बड़े भाग्य से प्राप्त होता है । जो  साधक गुरु की भक्ति करते हैं और जिनके ऊपर गुरु की कृपा रुपी प्रसाद अथवा आशीर्वाद होता है । उन्ही को इस समाधि योग नामक श्रेष्ठ योग की प्राप्ति होती है ।

विशेष

समाधि योग की प्राप्ति किन साधकों को होती है ? उत्तर है गुरु की भक्ति करने वालों को व जिनके ऊपर गुरु की विशेष कृपा दृष्टि होती है ।

मूल श्लोक · 7.2

विद्याप्रतीति: स्वगुरुप्रतीतिरात्मप्रतीतिर्मंनस: प्रबोध: । दिने दिने यस्य भवेत् स योगी सुशोभनाभ्यासमुपैति सद्य: ।। 2 ।।

भावार्थ

जिस साधक को ज्ञान प्राप्त करने में, अपने गुरु के प्रति व अपनी आत्मा के प्रति श्रद्धा का भाव होता है साथ ही जिसे अपने मन का पूरा ज्ञान होता है । वह साधक दिन- प्रतिदिन योग के अभ्यास में ऊँची स्थिति को प्राप्त करता है ।

Reader discussion

Comments (4)

These comments have been preserved from the original Dr. Somveer Yoga website.

  1. Aashish malhan

    Nice explain samadi yoga dr sahab.

  2. Suman

    बहुत अच्छा श्रीमान जी

  3. Anshu

    Prnam Aacharya ji bhut dhanyvad

  4. आलोक कुमार पटवा

    ॐ गुरुदेव!

    आपको छठें अध्याय की समाप्ति

    पर हृदय से परम आभार प्रेषित करता हूं।