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Gheranda Samhita

Gheranda Samhita Ch. 2 [1-6]

अध्याय 2: आसन

अध्याय परिचय

द्वितीय अध्याय ( आसन वर्णन )

घेरण्ड संहिता के दूसरे अध्याय में सप्तांग योग के दूसरे अंग अर्थात् आसन का वर्णन किया गया है । घेरण्ड ऋषि ने आसनों के बत्तीस ( 32 ) प्रकारों को माना है । घेरण्ड संहिता के अनुसार आसन करने से साधक के शरीर में दृढ़ता ( मजबूती ) आती है । अब आसनों के क्रम को प्रारम्भ करते हैं ।

मूल श्लोक · 2.1

आसनानि समस्तानि यावन्तो जीवजन्तव: । चतुरशीतिलक्षाणि शिवेन कथितानि च ।। 1 ।।

मूल श्लोक · 2.2

तेषां मध्ये विशिष्टानि षोडशोनं शतं कृतम् । तेषां मध्ये मर्त्यलोके द्वात्रिंशदासनं शुभम् ।। 2 ।।

भावार्थ

इस पृथ्वी पर जितने भी जीवजन्तु अर्थात् प्राणी हैं आसनों की संख्या भी उतनी ही मानी गई है । प्राचीन काल में भगवान शिव ने उनमें से चौरासी लाख ( 8400000 ) आसनों को माना है । उसके बाद अर्थात् मध्यकाल में चौरासी सौ ( 8400 ) आसनों को प्रमुख माना गया था । जिनमें से मृत्युलोक अर्थात् वर्तमान समय में मात्र बत्तीस ( 32 ) आसनों को ही मनुष्य के लिए शुभ अर्थात् कल्याणकारी माना गया है ।

विशेष

आसनों की संख्या के विषय में सभी योग आचार्यों के अलग - अलग मत हैं । जिनमें महर्षि घेरण्ड ने घेरण्ड संहिता में बत्तीस ( 32 ) आसनों का, स्वामी स्वात्माराम ने हठ प्रदीपिका में पन्द्रह ( 15 ) आसनों का, योगी श्रीनिवासन ने हठ रत्नावली में छत्तीस ( 36 ) आसनों का, योगी गुरु गोरक्षनाथ ने सिद्ध सिद्धान्त पद्धति में मात्र तीन ( 3 ) आसनों का, शिव संहिता में मात्र चार ( 4 ) आसनों का, योगदर्शन के व्यास भाष्य में महर्षि व्यास ने तेरह ( 13 ) आसनों का वर्णन किया है । ऊपर वर्णित आसनों की संख्या को सभी विद्यार्थी अच्छे से याद कर लें । इनसे सम्बंधित कोई भी प्रश्न परीक्षा में पूछा जा सकता है । इसके अतिरिक्त ऊपर वर्णित श्लोकों से सम्बंधित भी कुछ प्रश्न बनते हैं । जिनका वर्णन करना आवश्यक है । जैसे- आसनों की संख्या किनके बराबर मानी गई है ? जिसका उत्तर है सभी जीवजन्तुओं के बराबर । प्राचीन काल में भगवान शिव ने आसनों के कितने प्रकार ( संख्या ) माने हैं ? जिसका उत्तर है चौरासी लाख । मध्यकाल में आसनों के कितने प्रकारों को मान्यता मिली है ? जिसका उत्तर है चौरासी सौ । मृत्युलोक अर्थात् वर्तमान समय में, महर्षि घेरण्ड या घेरण्ड संहिता में आसनों की कितनी संख्या मानी गई है ? जिसका उत्तर है बत्तीस ।

बत्तीस आसनों के नाम

मूल श्लोक · 2.3

सिद्धं पद्मं तथा भद्रं मुक्तं वज्रञ्च स्वस्तिकम् । सिंहञ्च गोमुखं वीरं धनुरासनमेव च ।। 3 ।।

मूल श्लोक · 2.4

मृतं गुप्तं तथा मत्स्यं मत्स्येन्द्रासनमेव च । गोरक्षं पश्चिमोत्तानं उत्कटं संकटं तथा ।। 4 ।।

मूल श्लोक · 2.5

मयूरं कुक्कुटं कुर्मं तथाचोत्तानकूर्मकम् । उत्तान मण्डूकं वृक्षं मण्डूकं गरुडं वृषम् ।। 5 ।।

मूल श्लोक · 2.6

शलभं मकरं चोष्ट्रं भुजङ्गञ्चयोगासनम् । द्वात्रिंशदासनानि तु मर्त्यलोके हि सिद्धिदम् ।। 6 ।।

भावार्थ

इस मृत्युलोक अर्थात् वर्तमान समय में निम्न बत्तीस आसन ही मनुष्य को सिद्धि प्राप्त करवाने वाले हैं । जिनका वर्णन इस प्रकार है :- 1. सिद्धासन, 2. पद्मासन, 3. भद्रासन, 4. मुक्तासन, 5. वज्रासन, 6. स्वस्तिकासन, 7. सिंहासन, 8. गोमुखासन, 9. वीरासन, 10. धनुरासन, 11. मृतासन / शवासन, 12. गुप्तासन, 13. मत्स्यासन, 14. मत्स्येन्द्रासन, 15. गोरक्षासन, 16. पश्चिमोत्तानासन, 17. उत्कट आसन, 18. संकट आसन, 19. मयूरासन, 20. कुक्कुटासन, 21. कूर्मासन, 22. उत्तानकूर्मासन, 23. मण्डूकासन, 24. उत्तान मण्डूकासन, 25. वृक्षासन, 26. गरुड़ासन, 27. वृषासन, 28. शलभासन, 29. मकरासन, 30. उष्ट्रासन,

  1. भुजंगासन व 32. योगासन ।

Reader discussion

Comments (6)

These comments have been preserved from the original Dr. Somveer Yoga website.

  1. Neelam

    Thank you sir

  2. Lata Sudhir Baisane

    धन्यवाद।

  3. Nisha Dahiya

    Thanks sir

  4. आलोक कुमार पटवा

    ॐ गुरुदेव!

    अति उत्तम व्याख्या।

    आपको हृदय से आभार।

  5. Mamta

    Thank you sir

  6. Shankar Prajapati

    नमस्कार sir, यहा श्लोक 2 मे shod shonam satkam अर्थात 100में 16 कम 84 ; से तात्पर्य हे तथा यहाँ सब्दार्थ m 8400 लिखा हुआ है