Skip to content

Gheranda Samhita

Gheranda Samhita Ch. 5 [57-67]

अध्याय 5: प्राणायाम

सूर्यभेदी प्राणायाम वर्णन

मूल श्लोक · 5.57

कथितं सहितं कुम्भं सूर्यभेदनकं श्रृणु । पूरयेत् सूर्यनाड्या च यथाशक्ति बहिर्मरुत् ।। 57 ।।

मूल श्लोक · 5.58

धारयेद् बहुयत्नेन कुम्भकेन जलन्धरै: । यावत् स्वेदं नखकेशाभ्यां तावत्कुर्वतु कुम्भकम् ।। 58 ।।

भावार्थ

सहित कुम्भक का वर्णन किया जा चुका है । अब सूर्यभेदी प्राणायाम को सुनो - अपनी दायीं नासिका से बाहर की वायु को जितना सम्भव हो सके उतना भर लें ।

अब उस अन्दर भरी हुई वायु को जालन्धर बन्ध लगाकर तब तक अन्दर ही रोके रखें जब तक कि नाखूनों से लेकर सिर के बालों तक पसीना नहीं आ जाता ।

विशेष

सूर्यभेदी प्राणायाम करते हुए कितनी देर तक श्वास को अन्दर रोकना चाहिए ? उत्तर है जब तक कि नाखूनों से लेकर सिर के बालों तक पसीना नहीं आ जाता तब तक ।

सूर्यभेदी प्राणायाम शरीर में ऊष्मा अर्थात् गर्मी को बढ़ाता है । इसलिए जिनको उच्च रक्तचाप ( बी०पी० हाई ) व नकसीर ( नाक से खून बहना ) आदि समस्या रहती हों उनको इसका अभ्यास नहीं करना चाहिए । साथ ही गर्मी के मौसम में भी इसका अभ्यास नहीं करना चाहिए ।

पाँच प्राण व पाँच उपप्राण वर्णन

मूल श्लोक · 5.59

प्राणोऽपान: समानश्चोदानव्यानौ तथैव च । नाग: कूर्मश्च कृकलो देवदत्तो धनञ्जय: ।। 59 ।।

भावार्थ

प्राण, अपान, समान, उदान व व्यान ये पाँच प्राण होते हैं । नाग, कूर्म, कृकल, देवदत्त व धनञ्जय ये पाँच उपप्राण होते हैं ।

विशेष

प्राण कितने प्रकार के होते हैं ? उत्तर है पाँच । उपप्रानों की संख्या कितनी होती है ? उत्तर है पाँच ।

प्राणों को उनकी शरीर में स्थिति के अनुसार आरोही क्रम ( बढ़ते क्रम अथवा नीचे से ऊपर की ओर ) में व्यवस्थित करें - जिसका उत्तर है व्यान, अपान, समान, प्राण व उदान । प्राणों को शरीर में उनकी स्थिति के अनुसार अवरोही क्रम ( ऊपर से नीचे ) में रखें - जिसका उत्तर है उदान, प्राण, समान, अपान व व्यान ।

प्राणों का सामान्य क्रम क्या होता है ? उत्तर है प्राण, अपान, समान, उदान व व्यान ।

प्राणों का उपप्राणों से सम्बंध :-

प्राण का उपप्राण क्या होता है ? उत्तर नाग । अपान प्राण का उपप्राण क्या होता है ? उत्तर कूर्म । समान प्राण का उपप्राण क्या है ? उत्तर कृकल । उदान प्राण का उपप्राण कौन सा है ? उत्तर देवदत्त । व्यान प्राण का उपप्राण क्या है ? उत्तर धनञ्जय ।

कौन सा प्राण शरीर में कहाँ पर स्थित है ?

मूल श्लोक · 5.60

हृदि प्राणो वहेन्नित्यमपानो गुदामण्डले । समानो नाभिदेशे तु उदान: कण्ठमध्यग: ।। 60 ।।

मूल श्लोक · 5.61

व्यानो व्याप्त शरीरे तु प्रधाना: पञ्च वायव: । प्राणाद्या: पञ्च विख्याता नागाद्या: पञ्च वायव: ।। 61 ।।

भावार्थ

प्राण हृदय प्रदेश में, अपान गुदा प्रदेश में, समान नाभि प्रदेश में, उदान कण्ठ प्रदेश में व व्यान सम्पूर्ण शरीर में गमन अथवा स्थित होता है ।

इनमें से पाँच प्राण, अपान, समान, उदान व व्यान मुख्य होते हैं और नाग, कूर्म, कृकल, देवदत्त व धनञ्जय उपप्राण गौण होते हैं ।

विशेष

प्राण शरीर के किस भाग में होता है ? उत्तर है हृदय प्रदेश में । अपान प्राण का स्थान कहाँ पर है ? उत्तर है गुदा प्रदेश । समान प्राण का स्थान कहाँ पर होता है ? उत्तर नाभि प्रदेश में । उदान प्राण कहा स्थित है ? उत्तर है कण्ठ अथवा गले में । व्यान प्राण की स्थिति बताइये ? उत्तर है सम्पूर्ण शरीर में ।

दस प्राणों में किन्हें मुख्य प्राण माना जाता है ? उत्तर है पञ्च प्राणों ( प्राण, अपान, समान, उदान व व्यान ) को । उपप्राणों को अन्य किस नाम से जाना जाता है ? उत्तर है गौण प्राण के नाम से ।

पाँच उपप्राणों का शरीर में क्या- क्या कार्य होते हैं ?

मूल श्लोक · 5.62

तेषामपि च पञ्चानां स्थानानि च वदाम्यहम् । उद्गारे नाग आख्यात: कूर्मस्तून्मीलने स्मृत: ।। 62 ।।

मूल श्लोक · 5.63

कृकल: क्षुत्कृते ज्ञेयो देवदत्तो विजृम्भणे । न जहाति मृते क्वापि सर्वव्यापी धनञ्जय: ।। 63 ।।

भावार्थ

अब जो पाँच प्रकार के उपप्राण हैं उनके शरीर में स्थिति का वर्णन करता हूँ । डकार में नाग वायु, आँखों के खुलने व बन्द होने में कूर्म वायु, छीकनें में कृकल वायु, जम्भाई लेने में देवदत्त वायु व जो मरने के भी कुछ समय तक शरीर में ही स्थित रहती है वह धनञ्जय नामक वायु होती है ।

विशेष

डकार किस प्राण के कारण आती है ? उत्तर नाग । आँखों को खोलने व बन्द करने में किस प्राण का योगदान होता है ? उत्तर कूर्म । कृकल वायु का क्या कार्य होता है ? उत्तर छीकने का । देवदत्त प्राण का क्या कार्य होता है ? जम्भाई लेना । वो कौन सी वायु अथवा प्राण है जो मरने के बाद भी कुछ समय तक शरीर में ही रहता है ? उत्तर धनञ्जय ।

उपप्राणों के शरीर में कार्य

मूल श्लोक · 5.64

नागो गृह्णाति चैतन्यं कूर्मश्चैव निमेषणम् । क्षुत्तुषं कृकलश्चैव जृम्भणं चतुर्थेन तु । भवेद्धनञ्जयाच्छब्दं क्षणमात्रं न नि:सरेत् ।। 64 ।।

भावार्थ

नाग नामक वायु अथवा प्राण चेतना को ग्रहण करती है, कूर्म वायु से खोलने व बन्द करने का कार्य सम्पन्न होता है । भूख- प्यास का अनुभव कृकल वायु से, जम्भाई लेने का कार्य देवदत्त से होता है व धनञ्जय वायु कभी भी शरीर को एक पल के लिए भी नहीं छोड़ता ।

विशेष

चेतना का अनुभव किस वायु या प्राण द्वारा होता है ? उत्तर है नाग द्वारा । पलकों को खोलने व बन्द करने का कार्य किसके द्वारा सम्पादित किया जाता है ? उत्तर है कूर्म द्वारा । भूख व प्यास को कौन सा प्राण प्रेरित करता है ? उत्तर है कृकल । जम्भाई में कौन सी वायु कार्य करती है ? उत्तर है देवदत्त वायु । कौन सी वायु शरीर को एक पल के लिए भी नहीं छोड़ती ? उत्तर है धनञ्जय वायु ।

सूर्यभेदी प्राणायाम की पूर्णता

मूल श्लोक · 5.65

सर्वे ते सूर्यसम्भिन्ना नाभिमूलात् समुद्धरेत् । इडया रेचयेत् पश्चाद् धैर्येणाखण्डवेगत: ।। 65 ।।

भावार्थ

उन सभी ( प्राण व उपप्राणों ) को सूर्यभेदी प्राणायाम द्वारा नाभि से ऊपर उठाकर उनको धैर्य के साथ बायीं नासिका से वेगपूर्वक बाहर निकाल देना चाहिए ।

दोबारा अभ्यास

मूल श्लोक · 5.66

पुनः सूर्येण चाकृष्य कुम्भयित्वा यथाविधि । रेचयित्वा साधयेत्तु क्रमेण च पुनः पुनः ।। 66 ।।

भावार्थ

इसके बाद फिर से दायीं नासिका से वायु को अन्दर भरकर उसे उसी विधि के अनुसार अन्दर ही रोकते हुए बाहर निकाल दें । इस प्रकार साधक को इस सूर्यभेदी प्राणायाम का बार- बार अभ्यास करना चाहिए ।

सूर्यभेदी प्राणायाम के लाभ

मूल श्लोक · 5.67

कुम्भक: सूर्यभेदस्तु जरामृत्युविनाशक: । बोधयेत् कुण्डलीशक्तिं देहानलं विवर्धयेत् । इति ते कथितं चण्ड सूर्यभेदनमुत्तमम् ।। 67 ।।

भावार्थ

सूर्यभेदी प्राणायाम के अभ्यास से साधक बुढ़ापे व मृत्यु पर विजय प्राप्त कर लेता है । कुण्डलिनी शक्ति जागृत होती है व जठराग्नि प्रदीप्त होती है ।

हे चन्डकापालिक! इस प्रकार सूर्यभेदी नामक उत्तम प्राणायाम का वर्णन मैंने तुम्हारे सामने किया ।

विशेष

सभी लाभ परीक्षा के लिए उपयोगी है ।

Reader discussion

Comments (9)

These comments have been preserved from the original Dr. Somveer Yoga website.

  1. Neelam

    Very nice explanation , Thank you sir

  2. Aashish malhan

    Nice guru ji.

  3. आलोक कुमार पटवा

    ॐ गुरुदेव?

    आपका हृदय से आभार।

  4. Neepa Chatvani

    Nice explanation sir

  5. Rajpal Singh

    Very nice Guru ji

  6. Manisha Garg

    ????प्रणाम गुरुजी, VERY VERY GOOD article.

    बहुत ही beneficial रहेगा मेरे लिए… आभार ????????????

  7. Manisha Garg

    ???????? आपने ज्ञान देने में किसी भी तरह की कोई कमी नहीं रखी….

    I am overwhelmed ????????????????????????????????????

  8. Manisha Garg

    ???? Very Helpful ????????????????????

  9. Rajesh Kumar

    बहुत सुंदर सर बड़ी अच्छी तरह से आपने समझाया है।