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Shrimad Bhagwad Geeta

Shrimad Bhagwad Geeta Ch. 18 [72-74]

अध्याय 18: मोक्षसंन्यासयोग

मूल श्लोक · 18.72

कच्चिदेतच्छ्रुतं पार्थ त्वयैकाग्रेण चेतसा । कच्चिदज्ञानसम्मोहः प्रनष्टस्ते धनञ्जय ।। 72 ।।

व्याख्या

भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन से पूछते हैं - हे पार्थ ! क्या तुमने इस ज्ञान को एकाग्र चित्त से सुना है ? और हे धनंजय ! क्या इससे तुम्हारा अज्ञान से जनित ( उत्पन्न ) मोह नष्ट हो गया ?

विशेष

यह गीता में भगवान श्रीकृष्ण द्वारा बोला गया अन्तिम श्लोक है ।

अर्जुन उवाच

मूल श्लोक · 18.73

नष्टो मोहः स्मृतिर्लब्धा त्वप्रसादान्मयाच्युत । स्थितोऽस्मि गतसंदेहः करिष्ये वचनं तव ।। 73 ।।

व्याख्या

अर्जुन कहता है - हे अच्युत ! ( श्रीकृष्ण ) आपके द्वारा दिए गए ज्ञान की कृपा से मेरा मोह नष्ट हो गया है और मुझे मेरे कर्तव्य की स्मृति हो गई है अथवा मुझे मेरे कर्तव्य का बोध ( ज्ञान ) हो गया है । अब मैं सन्देह रहित होकर स्थिरता को प्राप्त हो गया हूँ और आपके कथन के अनुसार युद्ध करूँगा ।

विशेष

यह अर्जुन द्वारा बोला गया अन्तिम श्लोक है, जिसमें वह गीता ज्ञान द्वारा अपने मोह के नष्ट होने की पुष्टि करता है और युद्ध के लिए तैयार हो जाता है ।

जिस प्रकार मैंने गीता के परिचय में गीता के इस अतुल्य ज्ञान को देने के पीछे जो 'राग' नामक तर्क दिया था, इस श्लोक में उसकी पुष्टि हो गई । इससे पहले वाले श्लोक में भगवान श्रीकृष्ण पूछते हैं कि हे अर्जुन क्या इस गीता ज्ञान से तुम्हारा मोह नष्ट हुआ ? और उसके उत्तर में अर्जुन कहता है कि आप द्वारा दिए गए ज्ञान के कारण मेरा मोह नष्ट हो गया है ।

इन दोनों श्लोकों को सुनने से यह स्पष्ट हो जाता है कि अर्जुन कुरुक्षेत्र के मैदान में अपने सामने अपने स्वजनों को देखकर मोह उत्पन्न हो जाता है । इस अज्ञान जनित मोह की उत्पत्ति राग से होती है । हम सबका अपने परिचितों के प्रति एक विशेष प्रकार की आसक्ति अथवा लगाव होता है । जिसका मूल राग नामक क्लेश ही होता है ।

भगवान श्रीकृष्ण ने गीता के अनुपम ज्ञान द्वारा इसी राग नामक क्लेश से उत्पन्न मोह को नष्ट करके अर्जुन को कर्तव्य कर्म के लिए तैयार करने का काम किया है ।

संजय उवाच

मूल श्लोक · 18.74

इत्यहं वासुदेवस्य पार्थस्य च महात्मनः । संवादमिममश्रौषमद्भुतं रोमहर्षणम्‌ ।। 74 ।।

व्याख्या

संजय ने धृतराष्ट्र से कहा - इस प्रकार मैंने वासुदेव श्रीकृष्ण और महात्मा अर्जुन के बीच में शरीर को रोमांचित करने वाले अद्भुत संवाद को सुना ।