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Shrimad Bhagwad Geeta

Shrimad Bhagwad Geeta Ch. 16 [4-6]

अध्याय 16: दैवासुरसम्पद्विभागयोग

छ: आसुरी अवगुण ( आसुरी प्रवृत्ति के लक्षण )

मूल श्लोक · 16.4

दम्भो दर्पोऽभिमानश्च क्रोधः पारुष्यमेव च । अज्ञानं चाभिजातस्य पार्थ सम्पदमासुरीम्‌ ।। 4 ।।

व्याख्या

अब श्रीकृष्ण आसुरी सम्पदा के साथ पैदा हुए लक्षणों का वर्णन करते हुए कहते हैं - हे पार्थ ! दम्भ ( स्वयं को झूठे रूप में प्रस्तुत करना ), दर्प ( अपनी सुन्दरता, धन या फिर बल पर इतराना अथवा मान करना ) अभिमान करना ( केवल स्वयं को ही श्रेष्ठ समझना ), क्रोध ( गुस्सा करना ), वाणी में निष्ठुरता अथवा वाणी का कठोर होना और अज्ञान ( विषय का विपरीत ज्ञान अथवा सही जानकारी न होना ) - ये सभी लक्षण आसुरी सम्पत्ति के साथ पैदा होने वाले व्यक्तियों में पाए जाते हैं ।

विशेष

  • आसुरी सम्पदा के कितने लक्षणों का वर्णन सोलहवें अध्याय में किया गया है अथवा भगवान श्रीकृष्ण ने आसुरी प्रवृत्ति के कितने लक्षण बताए हैं ? उत्तर है - छ: ( 6 ) लक्षणों का वर्णन किया गया है ।
  • इसके अतिरिक्त इन आसुरी सम्पदा के लक्षणों को वैसे भी पूछा जा सकता है, इसलिए विद्यार्थीयों को इन छ: लक्षणों को भी याद करना चाहिए ।

दैवीय सम्पदा = मोक्षकारक, आसुरी सम्पदा = बन्धन कारक

मूल श्लोक · 16.5

दैवी सम्पद्विमोक्षाय निबन्धायासुरी मता । मा शुचः सम्पदं दैवीमभिजातोऽसि पाण्डव ।। 5 ।।

व्याख्या

इन दोनों सम्पदाओं में से जो दैवीय सम्पदा है, वह मोक्ष प्रदान करवाने वाली होती है और आसुरी सम्पदा मनुष्य के बन्धन का कारण ( पुनर्जन्म का कारण ) बनती है । हे पाण्डव ! तुम शोक अथवा चिन्ता मत करो, क्योंकि तुम दैवीय सम्पदा के साथ पैदा हुए हो ।

विशेष

  • दैवीय सम्पदा किस का कारण बनती है अथवा दैवीय गुणों के साथ पैदा हुआ व्यक्ति किसको प्राप्त होता है ? उत्तर है - मोक्ष को प्राप्त होता है ।
  • कौन सी सम्पदा बन्धन अथवा पुनर्जन्म का कारण बनती है ? उत्तर है - आसुरी सम्पदा ।

मूल श्लोक · 16.6

द्वौ भूतसर्गौ लोकऽस्मिन्दैव आसुर एव च । दैवो विस्तरशः प्रोक्त आसुरं पार्थ में श्रृणु ।। 6 ।।

व्याख्या

हे पार्थ ! इस संसार में मनुष्यों की दो प्रकार की प्रवृत्ति पाई जाती है - एक दैवीय और दूसरी आसुरी । दैवीय गुणों से युक्त व्यक्तियों का वर्णन हो चुका, अब आसुरी प्रवृत्ति वाले व्यक्तियों के बारे में विस्तारपूर्वक सुनो -

Reader discussion

Comments (2)

These comments have been preserved from the original Dr. Somveer Yoga website.

  1. Savita singh

    Most important sir

    ????????

  2. Anshu

    Prnam Aacharya ji. Sunder varnan. Thank you