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Shrimad Bhagwad Geeta

Shrimad Bhagwad Geeta Ch. 14 [7-9]

अध्याय 14: गुणत्रयविभागयोग

रजोगुण का प्रभाव

मूल श्लोक · 14.7

रजो रागात्मकं विद्धि तृष्णासङ्‍गसमुद्भवम्‌ । तन्निबध्नाति कौन्तेय कर्मसङ्‍गेन देहिनम्‌ ।। 7 ।।

व्याख्या

हे कौन्तेय ! यह रजोगुण रागात्मक होता है, जो इच्छाओं के प्रति आकर्षण अथवा आसक्ति से उत्पन्न होता है । यह जीवात्मा को कर्मफल के प्रति आसक्त ( लगाव ) करके शरीर के साथ बाँधता है ।

विशेष

  • रजोगुण का स्वभाव किस प्रकार का होता है ? उत्तर है - रागात्मक अथवा आसक्तिपूर्ण ।
  • रजोगुण की उत्पत्ति किसके कारण होती है ? उत्तर है - राग के कारण ।
  • रजोगुण के किस प्रभाव के कारण जीवात्मा शरीर के साथ बन्धता है ? उत्तर है - कर्मफल के प्रति आसक्ति ( लगाव ) होने के कारण ।

तमोगुण का प्रभाव

मूल श्लोक · 14.8

तमस्त्वज्ञानजं विद्धि मोहनं सर्वदेहिनाम्‌ । प्रमादालस्यनिद्राभिस्तन्निबध्नाति भारत ।। 8 ।।

व्याख्या

हे भारत ! सभी देहधारियों ( मनुष्यों ) को मोहित करके मार्ग से भ्रमित करने वाले तमोगुण की उत्पत्ति अज्ञान से होती है । यह जीवात्मा को प्रमाद, आलस्य और निद्रा के कारण बाँधता है ।

विशेष

  • तमोगुण की उत्पत्ति किसके द्वारा होती है ? उत्तर है - अज्ञान के द्वारा ।
  • तमोगुण के किन कारणों से जीवात्मा शरीर के साथ बन्धती है ? उत्तर है - प्रमाद, आलस्य व निद्रा के कारण ।

गुणों के प्रभाव

मूल श्लोक · 14.9

सत्त्वं सुखे सञ्जयति रजः कर्मणि भारत । ज्ञानमावृत्य तु तमः प्रमादे सञ्जयत्युत ।। 9 ।।

व्याख्या

हे भारत ! मनुष्य को यह सत्त्वगुण सुख में और रजोगुण कर्म में आसक्त कर देता है तथा यह तमोगुण ज्ञान को ढँक कर मनुष्य को प्रमाद में आसक्त कर देता है ।

विशेष

  • सत्त्वगुण से मनुष्य किसमें प्रवृत्त अथवा आसक्त होता है ? उत्तर है- सुख में ।
  • रजोगुण व्यक्ति को किसमें आसक्त करता है ? उत्तर है - कर्म में ।

तमोगुण व्यक्ति को किसमें आसक्त करता है ? उत्तर है - ज्ञान को ढँक कर प्रमाद में आसक्त करता है ।

Reader discussion

Comments (5)

These comments have been preserved from the original Dr. Somveer Yoga website.

  1. Savita singh

    Thank you sir ????????

  2. Aashish malhan

    Guru Ji nice explain about triguna.

  3. Neelam Dwivedi

    Very useful information, Thank you sir

  4. Bawan

    Dhanyawad Acharya sri

  5. Yogesh Sahu

    अतिसुन्दर sir…????????????