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Shrimad Bhagwad Geeta

Shrimad Bhagwad Geeta Ch. 11 [32-36]

अध्याय 11: विश्वरूपदर्शनयोग

श्रीभगवानुवाच

मूल श्लोक · 11.32

कालोऽस्मि लोकक्षयकृत्प्रवृद्धोलोकान्समाहर्तुमिह प्रवृत्तः । ऋतेऽपि त्वां न भविष्यन्ति सर्वे येऽवस्थिताः प्रत्यनीकेषु योधाः ।। 32 ।।

व्याख्या

भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं - मैं यहाँ पर सभी लोकों को नष्ट करने के लिए विकराल रूप धारण किया हुआ महाकाल हूँ, जो सभी लोकों का संहार करने के लिए ही प्रवृत्त हुआ हूँ । यदि तुम इस युद्ध में न भी होते तो भी प्रतिपक्ष की सेना में उपस्थित सभी योद्धा मृत्यु को ही प्राप्त होते अर्थात् इन सब योद्धाओं की मृत्यु निश्चित थी ।

मूल श्लोक · 11.33

तस्मात्त्वमुक्तिष्ठ यशो लभस्व जित्वा शत्रून्भुङ्‍क्ष्व राज्यं समृद्धम्‌ । मयैवैते निहताः पूर्वमेव निमित्तमात्रं भव सव्यसाचिन्‌ ।। 33 ।।

मूल श्लोक · 11.34

द्रोणं च भीष्मं च जयद्रथं च कर्णं तथान्यानपि योधवीरान्‌ । मया हतांस्त्वं जहि मा व्यथिष्ठायुध्यस्व जेतासि रणे सपत्नान्‌ ।। 34 ।।

व्याख्या

अतः तुम उठो और यश प्राप्त करके, इन सभी शत्रुओं पर विजय प्राप्त करके उन्नत अथवा समृद्ध राज्य का उपभोग करो । यह सभी योद्धा मेरे द्वारा पहले ही मारे जा चुकें हैं, इसलिए हे सव्यसाची अर्जुन ! तुम केवल निमित्त मात्र बनकर युद्ध करो ।

द्रोणाचार्य, भीष्म पितामह, जयद्रथ और कर्ण तथा अन्य सभी वीर योद्धा जो मेरे द्वारा मारे जा चुकें हैं, तुम उन सबको बिना किसी भय के मारो । जीत निश्चित रूप से तुम्हारी ही होगी, इसलिए तुम युद्ध करो ।

संजय उवाच

मूल श्लोक · 11.35

एतच्छ्रुत्वा वचनं केशवस्य कृतांजलिर्वेपमानः किरीटी । नमस्कृत्वा भूय एवाह कृष्णंसगद्गदं भीतभीतः प्रणम्य ।। 35 ।।

अर्जुन उवाच

मूल श्लोक · 11.36

स्थाने हृषीकेश तव प्रकीर्त्या जगत्प्रहृष्यत्यनुरज्यते च । रक्षांसि भीतानि दिशो द्रवन्ति सर्वे नमस्यन्ति च सिद्धसङ्‍घा: ।। 36 ।।

व्याख्या

संजय धृतराष्ट्र से कहते हैं- हे राजन् धृतराष्ट्र ! भगवान श्रीकृष्ण के इस पूरे उपदेश को सुनने के बाद मुकुटधारी अर्जुन ने काँपते हुए हाथ जोड़कर श्रीकृष्ण को नमस्कार करते हुए नम्रतापूर्वक कहा -

हे हृषिकेश ! ( कृष्ण ) यह बिल्कुल सही है कि सम्पूर्ण जगत् आपके गुणों का कीर्तन करते हुए प्रसन्न हो रहा है और साथ ही आपमें अपनी आस्था रखते हुए आपसे लगाव भी रखता है । इसके विपरीत सभी राक्षस आपसे भयभीत होकर दसों दिशाओं में भाग रहे हैं और सिद्ध गणों के सभी समूह आपको नमस्कार करते हैं ।

Reader discussion

Comments (3)

These comments have been preserved from the original Dr. Somveer Yoga website.

  1. Anshu

    Prnam AaCharya ji . Bhut bhut dhanyavad

  2. Savita singh

    Best explain sir ????????

  3. Aashish malhan

    Nice guru ji.